एनडी तिवारी पत्नी और बेटे के साथ बीजेपी में शामिल !

 18 Jan 2017  853
उत्तर प्रदेश से तीन बार मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी अपने पत्नी उज्वला और बेटे रोहित शेखर समेत बीजेपी में शामिल हो गए।  सूत्रों के अनुसार रोहित शेखर हल्द्वानी विधानसभा सीट से बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। गौरतलब है कि साल 1950 में उत्तर प्रदेश के गठन और साल 1951-52 में प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव में एनडी तिवारी ने नैनीताल सीट से सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।  कांग्रेस की हवा के बावजूद एनडी तिवारी चुनाव जीत गए और पहली विधानसभा के सदस्य के तौर पर सदन पहुंचे।
1 जनवरी 1976 को वे पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इनका पहला कार्यकाल बेहद संक्षिप्त था।  साल 1977 के जयप्रकाश आंदोलन के कारण 30 अप्रैल को उनकी सरकार गिर गयी। एनडी तिवारी तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।  वे पहले ऐसे नेता थे जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।  जब उत्तर प्रदेश का विभाजन हुआ और अलग से उत्तरांचल राज्य बना तो एनडी तिवारी उत्तरांचल के भी मुख्यमंत्री बने। इसके साथ ही एनडी तिवारी को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल भी बनाया जा चुका है लेकिन उनका राज्यपाल का कार्यकाल बेहद विवादास्पद रहा।
कांग्रेस के साथ एनडी तिवारी का रिश्ता साल 1963 से शुरू हुआ।  साल 1965 में वे कांग्रेस की टिकट पर काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए और पहली बार मंत्री परिषद में उन्हें जगह मिली।  कांग्रेस के साथ उनकी पारी कई साल चली।  साल 1968 में जवाहरलाल नेहरू युवा केंद्र की स्थापना के पीछे उनका बहुत बड़ा योगदान रहा।  साल 1969 से 1971 तक वे कांग्रेस की युवा संगठन के अध्यक्ष रहे।  नारायण दत्त तिवारी का जन्म साल 1925 में नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ।  नारायण दत्त के पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में बतौर अधिकारी थे।  नारायण दत्त तिवारी की शिक्षा हल्द्वानी, बरेली और नैनीताल में हुई। नारायण दत्त तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एमए की पढाई पूरी की है।
उन्होंने एमए की परीक्षा में विश्वविद्यालय में टॉप किया था।  इसके साथ ही उन्होंने  विश्वविद्यालय एलएलबी की डिग्री भी हासिल की है।  साल 1942 में एनडी तिवारी ब्रिटिश सरकार की साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ नारे वाले  पैम्पलेट छापने और उसमे सहयोग के आरोप में पकड़े गए।  उन्हें गिरफ्तार कर नैनीताल की जेल में डाल दिया गया।  15 महीने की जेल काटने के बाद वह साल 1944 में आजाद हुए।  साल 1947 में आजादी के साल ही वह इस विश्वविद्यालय की छात्र यूनियन के अध्यक्ष चुने गए।
यह उनके सियासी जीवन की पहली सीढ़ी। साल 1954 में एनडी तिवारी का विवाह सुशीला सनवाल से हुआ।  साल 1993 में उनकी पत्नी का निधन हो गया जिसके बाद साल 2014 में एनडी तिवारी ने उज्वला शर्मा से विवाह रचाया। कुलमिलाकर एनडी तिवारी को राजनीति के क्षेत्र में एक लंबा अनुभव है और इसी अनुभव का इस्तेमाल भारतीय राजनीति में करना चाहती है भारतीय जनता पार्टी !