स्वस्दी पीएम मोदी कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को पीएम मोदी ने किया संबोधित

 03 Nov 2019  30
संवाददाता/in 24 न्यूज़। 
पीएम मोदी ने बैंकॉक के निमिबुत्र स्टेडियम में ‘स्वस्दी पीएम मोदी' कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। मोदी ने शनिवार को स्वस्दी पीएम मोदी कार्यक्रम में कहा- भगवान राम की मर्यादा और बुद्ध की करुणा भारत-थाईलैंड की साझी विरासत उन्होंने कहा कि थाईलैंड के कण-कण और जन-जन में अपनापन नजर आता है। ये रिश्ते दिल, आत्मा, आस्था और अध्यात्म के हैं। भारत का नाम पौराणिक काल के जम्बूद्वीप से जुड़ा है। वहीं थाईलैंड स्वर्णभूमि का हिस्सा था। भगवान राम की मर्यादा और बुद्ध की करुणा हमारी साझी विरासत है। नॉर्थ-ईस्ट इंडिया एशिया का गेटवे बन रहा है, भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे शुरू होने से कारोबार बढ़ेगा। पिछले साल जनवरी में भारत ने इंडो-आसियान समिट की 25वीं वर्षगांठ की मेजबानी की थी, जिसमें 10 आसियान नेताओं ने शिरकत की थी। इस दौरान भारत ने यह घोषणा की थी कि वह आसियान-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप की सतत मजबूती के लिए काम करता रहेगा।इससे पहले मोदी आदित्य बिड़ला ग्रुप के वैश्विक व्यापार में 50 साल पूरे होने के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी भारत आने का सबसे अच्छा समय है। देश में जहां कई चीजें बेहतर हुई हैं तो कई चीजों में गिरावट आई है। भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ईज ऑफ लिविंग, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), जंगल क्षेत्र बढ़ा है। उत्पादकता, बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है। जबकि कर की दरें, लालफीताशाही, भ्रष्टाचार में कमी आई है।मोदी ने कहा कि भारत अब 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। 2014 में जब मेरी सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब भारत की जीडीपी दो ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर थी। पांच साल में हमने इसे लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाया। मैं विश्वास दिलाता हूं कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना भी जल्द पूरा होगा।मोदी शनिवार को तीन दिवसीय दौरे पर थाईलैंड पहुंचे हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, आसियान समिट में आने के लिए मोदी को थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान-ओ-चा ने न्योता दिया था। मोदी ईस्ट एशिया और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समिट में भी हिस्सा लेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की सातवीं आसियान-इंडिया समिट और छठवीं ईस्ट एशिया समिट होगी। मोदी के इस दौरे का उद्देश्य भारत और आसियान देशों के बीच संबंधों को और मजबूती देना है। इस दौरान कई समझौते होंगे।