महागठबंधन में फंसे सीट शेयरिंग के पेंच के बीच आरजेडी का नया फार्मूला

 30 Sep 2020  33

संवाददाता/in24 न्यूज़।

महागठबंधन को बचाकर रखने के लिए आरजेडी ने जो नया फार्मूला दिया है उसके तहत लेफ्ट माले,सीपीआई और सीपीएम को 22, मुकेश सहनी के वीआईपी को 6 और बचे 5 सीटों को झारखंड मुक्ति मोर्चा और मुलायम सिंह यादव की पार्टी सपा को दी जाएगी। खुद आरजेडी 146 सीटों पर अपने उम्मीवार को चुनावी मैदान में उतारेगी। बता दें कि महागठबंधन में शामिल होने के बाद लेफ्ट की ओर से आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को 53 सीटों की सूची दी गई थी। बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में भाकपा-माले 98 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे तीन सीटों पर जीत मिली थी, भाकपा 91 और माकपा 38 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन उन्हें कोई सीट नहीं मिली थी। यही वजह रही कि आरजेडी ने पिछला रिकार्ड देखते हुए भाकपा-माले, भाकपा एवं माकपा को उनकी मांग के मुताबिक सीटें देने को तैयार नहीं हुई। 2015 विधानसभा चुनाव में राजद, जदयू और कांग्रेस तीन दल का महागठबंधन था। लेकिन 2017 में नीतीश कुमार के एनडीए में वापसी के बाद RLSP, VIP, माले, CPI और CPM और HAM जैसी पार्टियां 2020 के चुनाव के लिए आरजेडी और कांग्रेस के साथ यानी महागठबंधन के साथ खड़ी हो गई थी। दरअसल महागठबंधन की रचना का मकसद एनडीए की सरकार हटाने के लिये विपक्षी मतों के बंटवारे को रोकना था। लेकिन हालात ऐसे बने कि जीतनराम मांझी की पार्टी 'हम' एनडीए में शामिल हो गई और RLSP प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने तो मायावती के BSP के साथ मिलकर नया मोर्चा ही बना लिया। बताया जा रहा है कि अब सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के नेता भी आरजेडी का नेतृत्व कर रहे लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव से नाराज हैं।आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने जिस मिशन को लेकर महागठबंध का निर्माण किया था, आज वो अपने लक्ष्य से भटक चुका है। दरअसल 2017 में नीतीश कुमार के एनडीए में वापसी के बाद लालू प्रसाद यादव ने बिहार के छोटे दलो के वोट का बिखराव रोकने के लिए अपने साथ जोड़ रहे थे। लेकिन लालू यादव के जेल में रहने की वजह से उनके छोटे बेटे और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरजेडी की कमान संभाल ली।