बिना पैसे नहीं चल सकता क्रिकेट - बीसीसीआई

 02 Jan 2017  1000
ब्यूरो रिपोर्ट / in24 न्यूज़
बीसीसीआई अपने बैंक अकाउंट्स फ्रीज होने की वजह से न्‍यूजीलैंड के साथ चल रही सी‍रीज को रद्द कर सकता है। जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने सोमवार को फंड पेमेंट गाइडलाइन्स ना मानने की वजह से बैंकों को बोर्ड के अकाउंट्स फ्रीज करने का ऑर्डर दिया था। कमेटी ने बैंकों से कहा था कि अगले ऑर्डर तक सभी पेमेंट पर रोक लगा दी जाए। ये वो पेमेंट हैं जिनके फैसले बोर्ड ने 30 सितंबर को मीटिंग के दौरान लिए थे। इस बीच जस्टिस लोढ़ा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि बीसीसीआई को रूटीन मैटर्स के फंड रोकने के लिए नहीं कहा गया है। किसी सीरीज के कैंसल होने का सवाल ही नहीं उठता।
बीसीसीआई अकाउंट्स फ्रीज पर आरएम लोढ़ा ने मंगलवार को कहा कि बीसीसीआई को स्टेट एसोसिएशंस को दिए जाने वाले बड़े फंड को रोकने के लिए कहा गया है। रूटीन मैटर्स के लिए फंड रोकने को नहीं कहा गया है। जस्टिस लोढ़ा ने कहा, "किसी खेल या सीरीज के कैंसल होने का सवाल ही नहीं उठता। बीसीसीआई को हमने सोमवार को ईमेल किया था जिसमें स्टेट एसोसिएशंस को बड़ा फंड नहीं दिए जाने की बात थी।" बीसीसीआई के खातों को फ्रीज नहीं किया गया है। इसका मतलब साफ है कि ईमेल को न केवल ठीक से पढ़ा नहीं गया बल्कि उसकी गलत तरीके से समझाया गया। ये बात कहीं नहीं थी कि रूटीन खर्चे मसलन मैच, क्रिकेट एक्टिविटी या एडमिनिस्ट्रेशन के लिए पैसा रोका जाएगा। हमने जो सिफारिश की है, उससे पिछले साल तैयार हो चुके चैंपियन ट्रॉफी के कैलेंडर पर भी असर नहीं पड़ेगा। भारत और न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज में अभी तक दो टेस्‍ट मैच हो चुके हैं। एक टेस्‍ट बचा है। वहीं, पांच वनडे खेले जाने हैं। अगर, बीसीसीआई सीरीज रद्द करने का फैसला लेता है तो यह सीरीज बीच में ही रद्द हो जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लोढ़ा कमेटी के इस फैसले के बाद बीसीसीआई काफी नाराज है। बीसीसीआई के एक अफसर ने बताया कि, "बोर्ड को सीरीज रद्द करने का फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, क्‍योंकि हमारे हाथ बांध दिए गए।" इसके साथ ही भारत में बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैड के साथ होने वाली सीरीज पर भी असर पड़ सकता है।
                                                                                                    कमेटी ने बैंकों को लिखे लेटर में कहा कि "हमने ये नोटिस किया है कि बीसीसीआई ने 30 सितंबर को एजीएम में कई मेंबर्स को बड़े अमाउंट देने का फैसला किया है। इन पर रोक लगा दी जाए।" लेटर की एक कॉपी बीसीसीआई के सेक्रेटरी अजय शिर्के, सीईओ राहुल जौहरी और ट्रेजरर अनिरुद्ध चौधरी को भी भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि,"आपको जानकारी होगी कि 31.8.2016 को हमने कुछ डायरेक्शन दिए थे। आपसे कहा गया था कि रूटीन मैटर्स के अलावा कोई डिसीजन न लिए जाएं।" लेटर में आगे कहा गया है कि "जो पेमेंट आप करने जा रहे हैं, उन्हें रूटीन फैसला नहीं माना जा सकता।
इस बारे में अब कोई फैसला न लें।" लेटर में कमेटी ने कहा कि, "बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं माना। इस कमेटी ने फंड पेमेंट पर जो गाइडलाइन्स दी थीं, उनका भी पालन नहीं किया गया। कोर्ट 6 तारीख को नए डायरेक्शन जारी करेगा। इसके पहले आप किसी तरह के पेमेंट नहीं करेंगे। अगर ऐसा होता है तो इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।" कमेटी ने 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए फैसले का जिक्र भी किया है। कोर्ट ने बोर्ड से कहा था कि वो लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने में मदद करे। लोढ़ा कमेटी पहले ही सुप्रीम कोर्ट को बता चुकी है कि बीसीसीआई ने उसकी सिफारिशें नहीं मानी। बहरहाल जहां बीसीसीआई कहती है कि बिना पैसों के क्रिकेट खेल जारी रखना संभव नहीं है वहीं सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि उन्होंने बैंकों को यह निर्देश नहीं दिया है कि वे बीसीसीआई के खाते सील करें।
वहीं मंगलवार की सुबह यह खबर आयी कि लोढ़ा पैनल के निर्देश पर बैंकों ने बीसीसीआई के खातों को फ्रीज कर दिया है।  इस पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्केंडय काटजू ने मंगलवार को ट्वीट किया कि बीसीआसीई का यह बर्ताव ठीक नहीं है इसलिए लोढ़ा पैनल को चाहिए कि वह बीसीसीआई अधिकारियों को निर्वस्त्र करके खंभे से बांधकर उन्हें 100 कोड़े लगाएं जिसके बाद यह मामला एक बार फिर गरमा गया है।