सुप्रीम कोर्ट ने दिया बीसीसीआई झटका, पुनर्विचार याचिका हुई खारिज !

 02 Jan 2017  1112
ब्यूरो रिपोर्ट / in24 न्यूज़
बीसीसीआई में सुधार लाने के लिए जस्टिस लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू करने हेतु सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दायर की गयी बोर्ड की पुनर्विचार यहिका मंगलवार को खारिज कर दी गयी। आपको बता दें कि 18 जुलाई को सर्वोच्च न्यायपालिका ने बीसीसीआई को जस्टिस लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने का फैसला सुनाया था, जिस पर बीसीसीआई ने 16 अगस्त को पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।  हालांकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चैम्बर में फैसला किया है और यह फैसला सीजेआई टीएस ठाकुर और जस्टिस बोबडे की बेंच ने दिया।
याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर फिर से विचार करे और इसके लिए पांच जजों की बेंच बनाई जाए। यह भी मांग की थी कि बेंच में चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर न हों। याचिका के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का फैसला कई मायनों में सही नहीं है। जस्टिस लोढ़ा पैनल न तो खेल के विशेषज्ञ हैं और न ही उनकी सिफारिशें सही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पैनल का गठन कर एक तरह से अपने फैसले की आउटसोर्सिंग की है. बीसीसीआई के लिए संसद में कोई कानून नहीं बनाया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया था कि चीफ जस्टिस ने इस मामले में अपना मन बना रखा है और वे बिना सुनवाई इस याचिका को खारिज कर सकते हैं।
इस याचिका पर सुनवाई खुली अदालत में करने की मांग भी की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के 18 जुलाई के फैसले के मुताबिक बीसीसीआई को लोढ़ा पैनल की सिफारिशें 6 महीने में लागू करनी हैं। फैसले के मुताबिक अब बोर्ड में न तो मंत्री और न ही अधिकारी शामिल हो पाएंगे. राजनेताओं पर पाबंदी नहीं है। बीसीसीआई में अब एक व्यक्ति-एक पद का नियम लागू होगा। बीसीसीआई में अधिकारियों की अधिकतम उम्र सीमा 70 साल होगी. ऐसी ही कई अन्य सिफारिशें पैनल ने की हैं, जो लागू की जानी हैं। बीसीसीआई ने लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को सही ठहराने के कोर्ट के फैसले का रिव्यू करने के लिए कोर्ट के सामने याचिका दायर की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की इस याचिका ख़ारिज कर दिया इसके साथ ही बीसीसीआई अध्यक्ष को कोर्ट ने फटकार भी बीते दिन लगायी थी।