करामाती भार्गवी, 12 साल में 170 मेडल !

 05 Jan 2017  2011
संजय मिश्रा / in24 न्यूज़
जीवन एक संघर्ष है और उस संघर्ष को जिसने अपना दोस्त बनाया उसे ही जीवन का असली मायने समझ में आया। आज हम जो आपको दिखाने जा रहे हैं उसे देखने के बाद आपकी अंतरात्मा से जो आवाज निकलेगी उसे आप जरूर सुनना, क्यों कि ये कहानी नही बल्कि हकीकत है। वो हकीकत जिसके साये में छिपा है ऐसा बीज, जिसने हवाओं के थपेडों को सहते हुए अंकुरण के लिए उचित स्थान को आखिरकर तलाश ही लिया। जी हाँ, 12 साल की भार्गवी संखे जिसने मार्शल आर्ट की दुनिया में अब तक 170 मैडल अपने नाम किये हैं। भार्गवी के पिता प्रशांत संखे भी किक बॉक्सिंग में अव्वल हैं और आज उन्होंने साये की तरह भार्गवी का न सिर्फ साथ दिया बल्कि आज उन्होंने भार्गवी को ऐसा बना दिया है जैसे पत्थर को तराशकर जौहरी उसे हीरा बनाता है।
प्रशांत संखे की यदि माने तो कोई भी उपलब्धि सुनने में आसान लगती है लेकिन उसके पीछे की जो मेहनत होती है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। अपनी बेटी के बारे में प्रशांत संखे कहते हैं कि भार्गवी अब उनकी बेटी नहीं है बल्कि पूरे भारत वर्ष की बेटी है। प्रशांत का कहना है कि भार्गवी प्रतिदिन 3 से 4 घंटे कराटे की प्रैक्टिस करती है उसमे वे भार्गवी का पिता बनकर नहीं बल्कि एकमार्गदर्शक बनकर उसका साथ देते है
महज चार साल की उम्र से ही प्रशांत संखे ने अपनी बेटी को अलग-अलग क्षेत्र में प्रशिक्षण देने के लिए उसे क्लासेस भेजा और जब उन्हें यकीन हो गया कि उनकी बेटी को फाइट में ज्यादा दिलचस्पी है तो उन्होंने उसके बाकि के क्लासेस बंद करवा कर कराटे का प्रशिक्षण देना शुरू करवाया और देखते ही देखते भार्गवी कराटे में निपुण होती चली गयी जिसके बाद भार्गवी ने कराटे प्रतियोगिता में एक के बाद एक कई मैडल अपने नाम किये। वैसे तो प्रशांत संखे की दो बेटियां हैं लेकिन प्रशांत का मानना है कि उनको यदि तीसरी औलाद ऊपरवाला देता है तो वे यही चाहेंगे कि तीसरी औलाद भी उन्हें बेटी ही पैदा हो।
भार्गवी ने मुंबई के गोरेगांव स्थित प्रबोधनकार ठाकरे मैदान में अपने गुरु सीताराम चव्हाण के सानिध्य में कराटे का प्रशिक्षण लिया और आज भार्गवी शोतोकॉन कराटे स्टाइल में प्रशिक्षित होकर बतौर ब्लैक बेल्ट सेकंड डैन हो चुकी है इसके साथ ही भार्गवी ने तालुका, जिला और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कराटे चैंपियनशिप प्रतियोगिता में 170 मैडल हासिल किया है। नालासोपारा के राहुल इंटरनेशनल स्कूल की सातवीं कक्षा की छात्रा है भार्गवी संखे, और उसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि वो इतनी कम उम्र में अंडर 17 कराटे टूर्नामेंट में महाराष्ट्र राज्य के लिए गोल्ड मैडल अपने नाम कर चुकी है ओपन कैटेगरी में भी भार्गवी ने कराटे की दुनिया में अपना लोहा मनवाया।
भार्गवी के माता-पिता को अपने इस बेटी पर अभिमान है और वो चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भार्गवी भारत का नाम रोशन करे।  भार्गवी के बारे में बताते हुए उनके पिता की आँखों में उस वक्त आंसू आ गए जब उनसे उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में पूछा गया। अपने पिता की आँखों में आंसू देख भार्गवी की आँखों से आंसू छलक पड़े।  भार्गवी कहती हैं कि वो अपने पिता से बहुत ज्यादा प्यार करती है और वो जब भी कराटे प्रतियोगिता की रिंग में उतरती है तो सबसे पहले वो यही सोचती है कि सामने वाले प्रतिस्पर्धी को बिना आहत किये  पॉइंट अर्जित कर अपनी जीत सुनिश्चित करे। अपने पिता को भार्गवी अपना आयडल मानती है ।
अपने गुरु के बारे में बताते हुए भार्गवी कहती हैं कि उनके गुरु ने हमेशा उसे यही सिखाया है कि माहौल कितना ही विपरीत हो , स्थिति कितनी ही विकट क्यों न हो खिलाड़ी को चाहिए कि वो सिर्फ और सिर्फ अपने खेल पर ध्यान दे। 12 साल की मार्शल आर्टिस्ट भार्गवी संखे कहती हैं कि उनकी कराटे की दुनिया को वो सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रखना चाहती वो इसे बढाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाडी बनना चाहती है और भारत का नाम रोशन करना चाहती हैं। अपने स्कूल के सहपाठियों के बारे में भार्गवी कहती हैं कि वो भले ही कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं लेकिन स्कूल में जब भी कहीं झगड़ा या विवाद होता है तो भार्गवी कभी भी अपने कराटे की कला का वहां पर इस्तेमाल नहीं करती। वहीँ घर और स्कूल सभी जगहों पर भार्गवी को लोगों का पूरा समर्थन मिलता है।
अंत में भार्गवी से उनके पिता प्रशांत संखे के बारे में पूछा गया कि अपने पिता से उन्हें किस तरह की प्रेरणा मिली तो उसकी आँखों से आंसू छलक आये जिसे छिपाने के लिए उसने अपने दोनों हाथ अपनी आँखों पर रख लिया। आखिर में भार्गवी ने सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ये इच्छा जताई कि सभी महिलाओं और देश की बेटियों को मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण देना चाहिए ताकि सभी अटैक और डिफेंस में माहिर होकर वो अपनी रक्षा खुद कर सकें। संखे परिवार का एक ऐसा बीज जो अब देखते ही देखते विशालकाय वृक्ष बनता जा रहा है। बीज का पौधे में बदलना और फिर वृक्ष रूप धारण करना शायद सुनने में आम बात लगे लेकिन यह वृक्ष आम वृक्षों में शामिल नहीं किया जा सकता इसकी जड़ों की गहराई से इसके पत्तों की चमक का अंदाजा लगाया जा सकता है । इसी तरह भार्गवी के नाम के इस बीज का विकसित होकर वृक्ष बनने की कहानी के पीछे छिपी है उसके पिता के दिन-रात की कड़ी मेहनत , सत्य , निष्ठां और परिवार का पूरा सहयोग । देश की ऐसी कामयाब बेटी को in24 न्यूज़ की तरफ से ढेर सारी शुभकामनायें और कोटि कोटि सलाम !