FSSAI रजिस्ट्रेशन के बिना चल रही थी बॉम्बे हाई कोर्ट की कैंटीन FDA की कार्रवाई से मचा हड़कंप
देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित अदालतों में से एक बॉम्बे हाई कोर्ट की कैंटीन को महाराष्ट्र ऑफ दी ए ने बिना फस फस ऐआई रजिस्ट्रेशन के चलाने के आरोप में बंद करा दिया है। ऑफ दी ए की टीम ने अचानक निरीक्षण के दौरान पाया कि कोर्ट परिसर में हजारों वकीलों, जजों और आम लोगों को खाना परोसने वाली इस कैंटीन के पास फूड सेफ्टी का जरूरी लाइसेंस ही नहीं था।
सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र ऑफ दी ए को शिकायत मिली थी कि बॉम्बे हाई कोर्ट की कैंटीन में साफ-सफाई और खाने की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके बाद ऑफ दी ए की एक विशेष टीम ने 30 जुलाई को अचानक छापा मारा। निरीक्षण में टीम ने पाया कि कैंटीन में चाय, नाश्ता, लंच और स्नैक्स की बिक्री तो हो रही थी, लेकिन संचालकों के पास फस फस ऐआई का रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस नहीं था। फस फस ऐआई यानी फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्स ऑथोर्टीय ऑफ़ इंडिया का नियम है कि कोई भी संस्थान जहां बड़े पैमाने पर खाने-पीने की चीजें बनती और बेची जाती हैं, उसके लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसमें खाने की गुणवत्ता, साफ-सफाई, स्टोरेज और कर्मचारियों की हेल्थ जांच से जुड़े नियम शामिल होते हैं।
निरीक्षण के तुरंत बाद ऑफ दी ए अधिकारियों ने कैंटीन संचालकों को नोटिस जारी किया और उसी समय कैंटीन की सर्विस बंद करवा दी। ऑफ दी ए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "ये बेहद गंभीर मामला है। बॉम्बे हाई कोर्ट जैसी जगह पर कानून का पालन सबसे पहले होना चाहिए। अगर यहां फूड सेफ्टी के नियमों की अनदेखी होगी तो आम जनता में क्या संदेश जाएगा। जब तक कैंटीन फस फस ऐआई से रजिस्ट्रेशन नहीं करवा लेती और सभी मानकों को पूरा नहीं करती, तब तक इसे बंद रखा जाएगा।" ऑफ दी ए टीम ने कैंटीन से खाने के सैंपल भी लिए हैं उन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
ऑफ दी ए की इस कार्रवाई के बाद कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया। रोजाना सैकड़ों वकील, क्लर्क, जज और मुवक्किल इसी कैंटीन पर निर्भर रहते हैं। अचानक कैंटीन बंद होने से सभी को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वकीलों ने कहा कि उन्हें बाहर से खाना मंगवाना पड़ा या भूखे ही काम करना पड़ा। बार एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने कहा, "हम फूड सेफ्टी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इतनी बड़ी कैंटीन को बिना नोटिस बंद करना गलत है। प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।" वहीं कुछ वकीलों ने ऑफ दी ए के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि सेहत से समझौता नहीं किया जा सकता।
फस फस ऐआई भारत में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली शीर्ष संस्था है। इसके नियमों के तहत हर फूड बिजनेस को रजिस्टर करना होता है। इसमें किचन की सफाई, पानी की शुद्धता, कच्चे माल की जांच, कर्मचारियों की मेडिकल जांच और खाने को सुरक्षित तापमान पर रखने के नियम शामिल हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़ी संस्थाओं में फूड पॉइजनिंग और बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। कोर्ट जैसी जगह जहां दिनभर भीड़ रहती है, वहां एक छोटी लापरवाही भी सैकड़ों लोगों को बीमार कर सकती है।
अब कैंटीन संचालकों को फस फस ऐआई की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर रजिस्ट्रेशन लेना होगा। इसके बाद ऑफ दी ए की टीम दोबारा निरीक्षण करेगी। अगर सभी मानक पूरे पाए गए तो ही कैंटीन को फिर से शुरू करने की अनुमति मिलेगी। इस प्रक्रिया में 15 से 30 दिन लग सकते हैं। ऑफ दी ए ने ये भी कहा है कि मुंबई की सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी कैंटीनों की जांच की जाएगी। अगर कहीं और भी ऐसी लापरवाही मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर इस खबर के आते ही लोगों ने मिले-जुले रिएक्शन दिए। कई लोगों ने कहा कि "कानून सबके लिए बराबर है" और ऑफ दी ए ने सही किया। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि इतने सालों से कैंटीन कैसे चल रही थी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।---