13 साल के रॉय किम का कमाल: हवा की नमी से बना दिया पीने का पानी, दुनिया हैरान
वाशिंगटन। अमेरिका के 13 साल के एक स्कूली छात्र रॉय किम ने ऐसा यंत्र बना दिया है जो हवा में मौजूद नमी को पीने के पानी में बदल देता है। रॉय की इस खोज ने विज्ञान जगत में तहलका मचा दिया है। कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद रॉय को "यंग इनोवेटर ऑफ द ईयर" का खिताब भी मिला है। रॉय किम कैलिफोर्निया के एक पब्लिक स्कूल में 8वीं कक्षा के छात्र हैं। पानी की कमी की समस्या से परेशान होकर उन्होंने 6 महीने की मेहनत से यह डिवाइस तैयार किया।
क्या है ये यंत्र और कैसे काम करता है?
रॉय के बनाए यंत्र का नाम "एटमॉस वॉटर जनरेटर" रखा गया है। यह यंत्र हवा से नमी सोखकर उसे ठंडा करता है और पानी की बूंदों में बदल देता है। फिर उस पानी को फिल्टर करके पीने लायक बनाया जाता है। रॉय ने बताया, "मैंने देखा कि हमारे घर के एयर कंडीशनर से पानी की बूंदें टपकती हैं। तभी मेरे दिमाग में आया कि अगर हवा से पानी निकाला जा सकता है तो क्यों न एक ऐसा यंत्र बनाया जाए।"
यंत्र की खासियत:
1. बिजली की कम खपत: यह सोलर पैनल से भी चल सकता है।
2. 24 घंटे में 10 लीटर पानी: एक दिन में 10 लीटर तक साफ पानी बना सकता है।
3. कम लागत: इसे बनाने में सिर्फ 150 डॉलर यानी करीब 12,500 रुपये का खर्च आया।
4. पोर्टेबल: इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है।
प्रेरणा कहां से मिली?
रॉय ने एक न्यूज़ में पढ़ा था कि दुनिया के कई हिस्सों में पीने के पानी की भारी किल्लत है। अफ्रीका और भारत के कुछ इलाकों में लोग मीलों चलकर पानी लाते हैं। रॉय ने ठान लिया कि वह इस समस्या का हल निकालेंगे। उन्होंने यूट्यूब, साइंस की किताबें और अपने स्कूल के साइंस टीचर की मदद से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। पहले 4 प्रो टाइप फेल हुए, लेकिन रॉय ने हार नहीं मानी। 5वीं बार में उन्हें सफलता मिली।
स्कूल और परिवार का सहयोग
रॉय के स्कूल ने उन्हें लैब और मेंटरशिप दी। उनके पिता जो एक इंजीनियर हैं, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बनाने में मदद की। रॉय की मां ने कहा, "हमें गर्व है कि हमारा बेटा दुनिया की मदद करना चाहता है।" स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. माइकल ग्रेग ने रॉय के यंत्र की जांच की। उन्होंने कहा, "13 साल के बच्चे के लिए यह अविश्वसनीय है। इसकी कार्यक्षमता 70% है जो बाजार में मिलने वाले बड़े यंत्रों के बराबर है।" संयुक्त राष्ट्र के जल संसाधन विभाग ने भी रॉय के प्रोजेक्ट की सराहना की है। उनका कहना है कि अगर इसे बड़े पैमाने पर बनाया जाए तो सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मदद मिल सकती है।
भारत के लिए कितना उपयोगी?
भारत में राजस्थान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कई जिले पानी की कमी से जूझते हैं। रॉय का यंत्र वहां बहुत काम आ सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र के किनारे वाले इलाकों में हवा में नमी ज्यादा होती है, इसलिए वहां यह यंत्र और भी बेहतर काम करेगा। एक भारतीय वैज्ञानिक ने कहा, "अगर भारत सरकार रॉय से संपर्क करे तो हम इसे 'मेक इन इंडिया' के तहत बना सकते हैं।"
रॉय का सपना
पुरस्कार मिलने के बाद रॉय ने कहा, "मैं चाहता हूं कि मेरा यंत्र हर गरीब के घर तक पहुंचे। पैसा कमाना मेरा मकसद नहीं है।" रॉय अब इस यंत्र को और छोटा और सस्ता बनाने पर काम कर रहे हैं ताकि हर कोई इसे खरीद सके उन्हें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और टेस्ला जैसी कंपनियों से इंटर्नशिप के ऑफर भी मिले हैं। लेकिन रॉय ने कहा कि वह पहले अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे।
सोशल मीडिया पर वायरल
रॉय का वीडियो सोशल मीडिया पर 5 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है। लोग उन्हें "लिटिल साइंटिस्ट" और "वॉटर हीरो" कहकर बुला रहे हैं। #RoyKim और #WaterFromAir ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस यंत्र को बड़े स्तर पर लाने के लिए फंडिंग और पेटेंट की जरूरत होगी। साथ ही हवा में प्रदूषण होने पर पानी को और बेहतर फिल्टर करना पड़ेगा।