पाकिस्तान-ईरान जंग के कगार पर? कतर बीच-बचाव में कूदा, अमेरिका के जनरल ने किया बड़ा खुलासा
अमेरिका के एक वरिष्ठ जनरल ने बड़ा दावा करके दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला ने वाशिंगटन में एक ब्रीफिंग के दौरान कहा कि पाकिस्तान और ईरान के बीच पिछले हफ्ते स्वात में हुए हमले के बाद से तनाव बहुत बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि इस तनाव को कम करने के लिए खाड़ी देश कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करवा रहा है। जनरल कुरिल्ला के अनुसार कतर के विदेश मंत्री दोहा में पाकिस्तान और ईरान के सुरक्षा सलाहकारों के साथ बंद कमरे में बातचीत कर रहे हैं। ये बयान ऐसे समय आया है जब 28 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के स्वात जिले में एक आत्मघाती हमले में 14 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तान ने इस हमले के लिए ईरान में छिपे आतंकी संगठन जैश-अल-अदल को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद पाकिस्तान ने ईरान की सीमा पर सेना तैनात कर दी थी और ईरान ने भी जवाब में अपनी सीमा पर फौज बढ़ा दी थी। ऐसे में अमेरिका के इस दावे ने सबका ध्यान खींचा है कि क्या वाकई जंग टल गई है।
स्वात हमले से कैसे बढ़ा तनाव - पूरा घटनाक्रम
28 जुलाई की रात स्वात जिले के मिंगोरा इलाके में पाकिस्तानी सेना के काफिले पर एक फिदायीन हमलावर ने हमला कर दिया। इस हमले में 14 जवान शहीद हो गए और 22 घायल हुए। हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन जैश-अल-अदल ने ली। ये संगठन बलूचिस्तान और ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय है। पाकिस्तान की सेना ने तुरंत बयान जारी करके कहा कि हमलावरों को ईरान की जमीन से मदद मिली थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने ईरान के राजदूत को तलब करके कड़ा विरोध जताया। जवाब में ईरान ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नाकामी का ठीकरा हम पर फोड़ रहा है। इसके बाद दोनों देशों ने अपनी-अपनी सीमा पर टैंक और तोपें तैनात कर दीं। सोशल मीडिया पर दोनों देशों के लोग एक दूसरे के खिलाफ जहर उगलने लगे। जानकारों का कहना था कि अगर 24 घंटे में बातचीत नहीं हुई तो सीमा पर गोलीबारी शुरू हो सकती थी। इसी बीच कतर ने दोनों देशों से संपर्क किया और कहा कि वो मध्यस्थता के लिए तैयार है।
कतर क्यों कर रहा मध्यस्थता और अमेरिका का क्या रोल
कतर पिछले कई सालों से दुनिया के बड़े झगड़े में मध्यस्थता करता रहा है। उसने अमेरिका-तालिबान, इजरायल-हमास और सऊदी-ईरान के बीच भी बातचीत करवाई है। कतर के पास पैसा भी है और दोनों मुस्लिम देशों का भरोसा भी। इसलिए पाकिस्तान और ईरान दोनों कतर की बात मानने को तैयार हो गए। जनरल कुरिल्ला ने कहा कि अमेरिका भी पर्दे के पीछे से इस प्रक्रिया में मदद कर रहा है। अमेरिका नहीं चाहता कि पाकिस्तान और ईरान के बीच जंग हो क्योंकि इससे अफगानिस्तान में स्थिरता बढ़ती और आतंकवाद को बढ़ावा मिलेगा। अमेरिका ने कतर को खुफिया जानकारी भी दी है ताकि आतंकी संगठनों के ठिकानों का पता लगाया जा सके। हालांकि ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कतर की मध्यस्थता की पुष्टि नहीं की है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने सिर्फ इतना कहा कि "हम शांति चाहते हैं लेकिन अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे।"
भारत और क्षेत्र पर इसका क्या असर पड़ेगा
पाकिस्तान और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से सबसे ज्यादा चिंता भारत को है। भारत की 900 किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान से लगती है और ईरान के साथ भारत के अच्छे व्यापारिक संबंध हैं। अगर दोनों देशों में जंग होती तो तेल की कीमतें आसमान छू लेती और भारत के चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर असर पड़ता। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान दो मोर्चों पर लड़ाई नहीं लड़ सकता। इसलिए वो कतर की मध्यस्थता मानने को मजबूर है। वहीं ईरान भी इजराइल और अमेरिका से पहले से परेशान है। उसे पाकिस्तान से दूसरा झगड़ा नहीं चाहिए। कतर की मध्यस्थता सफल होती है तो दक्षिण एशिया में शांति बनी रहेगी। अगर नाकाम होती है तो सीमा पर गोलीबारी और ड्रोन हमले शुरू हो सकते हैं। भारत सरकार ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है और कहा है कि आतंकवाद का कोई भी रूप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष और आगे क्या हो सकता है
अभी तक कतर की मध्यस्थता के कोई ठोस नतीजे सामने नहीं आए हैं। लेकिन अमेरिकी जनरल के बयान से इतना साफ है कि पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। अगले 7-10 दिन बहुत अहम हैं। अगर दोनों देश युद्ध विराम पर सहमत हो जाते हैं और आतंकियों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करते हैं तो ये बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। अगर बात बिगड़ती है तो सीमा पर तनाव और बढ़ सकता है। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो स्वात जैसे इलाकों में आतंकवाद को कैसे रोके। ईरान के लिए चुनौती ये है कि वो अपने यहां पनप रहे आतंकी गुटों पर लगाम कैसे लगाए। फिलहाल दुनिया की निगाहें दोहा पर टिकी हैं। क्योंकि कतर की एक गलती से पूरे क्षेत्र में आग लग सकती है और एक समझदारी से शांति भी हो सकती है। [∼2000 शब्द]