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महाराष्ट्र सरकार पर सुप्रीम का फैसला !

25 Nov, 2019 903
संवाददाता/in24न्यूज़. महाराष्ट्र में पिछले 3 दिनों से मचे राजनीतिक घमासान के बीच विपक्षी दलों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई जिसमें शिवसेना की तरफ से कपिल सिब्बल, एनसीपी-कांग्रेस की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, देवेंद्र फडणवीस की ओर से मुकुल रोहतगी तो वही अजित पवार की तरफ से मनिंदर सिंह और केंद्र की तरफ से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अजित पवार के गवर्नर को दिए गए पत्र में 54 विधायकों के हस्ताक्षर थे. फ्लोर टेस्ट सबसे बेहतर है लेकिन कोई पार्टी यह नहीं कह सकती यह 24 घंटे में ही हो. इस पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जब दोनों पक्ष लोड टेस्ट चाहते हैं तो इसमें देरी आखिर क्यों हो रही है ? सब की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया अदालत मंगलवार की सुबह लगभग 10:30 बजे निर्णय सुनाएगी. आज हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस संजीव खन्ना ने अपने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में फ्लोर टेस्ट 24 घंटे में हुआ है और कुछ मामलों में तो फ्लोर टेस्ट के लिए 48 घंटे तक दिए गए. क्या पार्टियां फ्लोर टेस्ट के मुद्दे पर कुछ कहना चाहेंगे इस पर सबसे पहले सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का पत्र सुप्रीम कोर्ट को सौंपा. मेहता ने पूछा कि क्या अनुच्छेद 32 के तहत किसी याचिका में राज्यपाल के फैसले को चुनौती दी जा सकती है. राज्यपाल ने 9 नवंबर तक इंतजार किया उसके बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया. अजित पवार के गवर्नर को दिए गए पत्र में 54 विधायकों के हस्ताक्षर थे अजीत पवार ने चिट्ठी में खुद को एनसीपी विधायक दल का नेता बताया था. गवर्नर को खुद मिले पत्र की जांच करने की जरूरत नहीं थी देवेंद्र फडणवीस को सरकार गठन के लिए बुलाने का फैसला उन्होंने सामने रखे गए दस्तावेजों के आधार पर लिया. मुकुल रोहतगी ने दलील देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि चुनाव से पहले गठबंधन में बीजेपी के साथ रही शिवसेना ने नतीजों के बाद साथ छोड़ दिया इसके बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया. फडणवीस को बाद में एनसीपी से समर्थन पत्र मिला इसलिए वे 170 विधायकों के समर्थन के साथ राज्यपाल के पास गए और राष्ट्रपति शासन हटाया गया, जिसके बाद देवेंद्र फडणवीस का बतौर मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण हुआ. मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि एक पवार हमारे साथ थे और एक विपक्ष के साथ. उनके बीच कोई पारिवारिक विवाद रहा होगा यह हमारे लिए चिंता की बात नहीं थी. वह हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल रहे हम नहीं. मौजूदा मामला साल 2018 के कर्नाटक मामले से अलग है यहां राज्यपाल के सामने बहुमत दिखाने वाले सभी दस्तावेज मौजूद थे. कोई यह नहीं कह रहा कि विधायकों के हस्ताक्षरों के साथ गड़बड़ी की गई. राज्यपाल ने सभी पार्टियों को मौका दिया उन्होंने अपने सामने मौजूद दस्तावेजों के जरिए समझदारी से फैसले लिए. जस्टिस खन्ना ने जब पूछा कि क्या देवेंद्र फडणवीस आज बहुमत सिद्ध कर सकते हैं इस पर मुकुल रोहतगी ने कहा सवाल यह है कि क्या कोर्ट इस मामले में कोई अंतरिम आदेश दे सकता है ? क्या कोर्ट किसी निश्चित अवधि में फ्लोर टेस्ट कराने के लिए कह सकता है मेरे हिसाब से नहीं ! मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के फैसले की न्यायिक समीक्षा न करने के लिए कहा. वही कपिल सिब्बल की दलीलों पर यदि गौर किया जाए तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सुबह 5:17 पर राष्ट्रपति शासन हटाने और सुबह 8:00 बजे शपथ दिलवाने की नेशनल इमरजेंसी क्या थी ? सुबह 5:17 पर राष्ट्रपति शासन हटाने के दो मायने समझे जा सकते हैं कि सुबह 5:17 से पहले ही सब कुछ तय हो चुका था. कपिल सिब्बल ने कोर्ट से लोड टेस्ट के लिए 24 घंटे की मांग की. सब रात के अंधेरे में हुआ नए अवसर दरवाजा खटखटा रहे हैं दिन के उजाले में फ्लोर टेस्ट होने दें. वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलीलों में कहा कि जब दोनों ही समूह फ्लोर टेस्ट चाहते हैं तो इसमें देरी क्यों हो रही है ? एनसीपी का कोई भी विधायक बीजेपी गठबंधन में शामिल हुआ इस तरह के संकेत देता कोई पत्र मौजूद है ? लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी की जा रही है बीजेपी गठबंधन ने अदालत को बताया कि उनके पास एनसीपी के 54 विधायकों के पत्र हैं अजीत पवार को विधायक दल का नेता चुना गया है. बीजेपी को समर्थन देने के मकसद से दस्तखत नहीं किए गए थे राज्यपाल इसे नजरअंदाज कैसे कर सकते हैं ? मनिंदर सिंह ने अपनी दलील में कहा अजित पवार एनसीपी का नेतृत्व करते हैं और महाराष्ट्र के राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए देवेंद्र फडणवीस को देखकर सही फैसला लिया. बहरहाल इस पूरे मामले पर अब मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी जिसके बाद ही साफ़ हो पाएगा कि फ्लोर टेस्ट कितने समय में फडणवीस को देना है और दूसरा कि क्या फडणवीस बहुमत साबित कर पाएंगे ? 

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