2027 चुनाव से पहले BJP का मास्टरप्लान
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने अपनी पूरी तैयारी अभी से शुरू कर दी है। पार्टी ने पूरे प्रदेश में एक गुप्त सर्वे कराया है। इस सर्वे की रिपोर्ट सीधे दिल्ली में बैठे केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। इस सर्वे का मकसद साफ है - गठबंधन सहयोगियों की ताकत जांचना, मौजूदा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड बनाना और हर सीट पर सबसे मजबूत उम्मीदवार को चुनना। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार "जीत" ही सबसे बड़ा पैमाना होगा, न कि पुरानी वफादारी या रसूख।
1. गठबंधन सहयोगियों की जमीनी हकीकत
BJP इस बार अपने सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर कोई गलती नहीं करना चाहती। सर्वे में अपना दल, निषाद पार्टी और अन्य छोटे सहयोगियों की हर विधानसभा में पकड़ को मापा गया है। ये देखा गया है कि सहयोगी दल अपने वोटरों को BJP के पक्ष में कितना ट्रांसफर कर पाते हैं। अगर किसी सीट पर सहयोगी कमजोर पाया गया तो वहां BJP खुद चुनाव लड़ सकती है। सर्वे टीम ने गांव-गांव जाकर ये फीडबैक लिया कि लोग गठबंधन से खुश हैं या नहीं।
2.मौजूदा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड
ये सर्वे का सबसे अहम हिस्सा है। 2022 में जीते हुए हर BJP बीजेपी विधायक के कामकाज का ऑडिट किया गया है। टीम ने जनता से पूछा कि विधायक 5 साल में कितनी बार क्षेत्र में आए, विकास कार्य हुए या नहीं, और लोगों की शिकायतें सुनी गईं या नहीं। जहां एंटी-इनकम्बेंसी ज्यादा मिली है, वहां विधायक का टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि 2027 में "चेहरा" हार का कारण बने।
3. संभावित उम्मीदवारों की रैंकिंग
हर विधानसभा सीट के लिए 3 से 4 नाम शॉर्टलिस्ट किए गए थे। सर्वे में लोगों से पूछा गया कि इनमें से वो किसे वोट देंगे और क्यों। इसमें नए चेहरे, महिला उम्मीदवार, युवा नेता और स्थानीय मुद्दों को उठाने वाले लोगों को प्राथमिकता दी गई। सर्वे में जातीय समीकरण को भी बहुत तवज्जो दी गई। किस जाति की आबादी कितनी है और कौन सा उम्मीदवार उस समीकरण को साध सकता है, ये सब रिपोर्ट में लिखा गया है।
4.क्षेत्रीय और जातीय समीकरण
UP में चुनाव जाति और क्षेत्र के बिना नहीं जीता जा सकता। इसलिए सर्वे टीम ने हर जिले में ब्राह्मण, ठाकुर, यादव, दलित, मुस्लिम और OBC वोटरों का मूड भांपा। साथ ही महंगाई, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और किसान के मुद्दों को लेकर लोगों की राय भी ली गई। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि किस क्षेत्र में किस मुद्दे पर ज्यादा काम करने की जरूरत है।
BJP की आगे की रणनीति क्या होगी
सर्वे रिपोर्ट आने के बाद केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होगी। उसी बैठक में तय होगा कि किस सीट पर किसे टिकट देना है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कम से कम 30-40% विधायकों का टिकट कट सकता है। गठबंधन को लेकर भी फैसला सर्वे के आंकड़ों से ही होगा। अगर किसी सहयोगी की हालत खराब मिली तो उसकी सीटें कम की जा सकती हैं। वहीं जिन सहयोगियों का प्रदर्शन अच्छा है उन्हें इनाम के तौर पर ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। पार्टी महिलाओं और युवाओं को 2027 में ज्यादा टिकट देने की सोच रही है। इसका कारण है कि Gen Z और महिलाएं अब चुनाव का बड़ा फैक्टर बन गई हैं।
2022 में BJP को पूर्ण बहुमत मिला था लेकिन 50 से ज्यादा सीटों पर हार-जीत का अंतर बहुत कम था। विपक्ष भी अब एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में BJP कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। पार्टी का मानना है कि चुनाव से 1.5 साल पहले ही अगर कमजोर कड़ियों को पहचान लिया जाए तो उन्हें सुधारने का समय मिल जाएगा। इसीलिए इस सर्वे को "2027 का ब्लूप्रिंट" कहा जा रहा है। र्वे की रिपोर्ट पूरी तरह गोपनीय रखी गई है। सिर्फ PM, गृहमंत्री और BJP अध्यक्ष ही इसे देख पाएंगे।