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केशव मौर्य का बड़ा बयान मदरसों में सिर्फ कुरान नहीं, NCERT भी पढ़ाओ शुरू हुई नई बहस

04 Aug, 2026 17

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 4 अगस्त 2026 को लखनऊ में एक शिक्षा सम्मेलन में ऐसा बयान दिया जिसने पूरे राज्य में बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि "मदरसों में सिर्फ कुरान और हदीस पढ़ाने से काम नहीं चलेगा। वहां के बच्चों को भी 21वीं सदी की दौड़ में शामिल होना है।"
मौर्य ने क्या कहा?

मौर्य ने मंच से 3 ठोस मांगें रखीं।

पहली मांग। सभी मदरसों के पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की किताबें अनिवार्य की जाएं। विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर पढ़ाना जरूरी हो। दूसरी मांग। हर 6 महीने में सरकारी अधिकारियों द्वारा मदरसों का निरीक्षण हो। ये देखा जाए कि वहां पढ़ाई ठीक से हो रही है या नहीं। तीसरी मांग। मदरसों को सरकार से जो अनुदान मिलता है उसका लेखा परीक्षण सार्वजनिक किया जाए। ताकि ये पता चले कि पैसा सही जगह लग रहा है या नहीं। मौर्य ने कहा "हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। लेकिन शिक्षा का उद्देश्य रोजगार देना भी है। अगर मदरसों के बच्चे आईएएस, इंजीनियर और डॉक्टर नहीं बनेंगे तो वो पीछे रह जाएंगे।"

भारतीय जनता पार्टी का समर्थन

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने मौर्य के बयान को "ऐतिहासिक सुधार" बताया। उन्होंने कहा कि इसका मकसद किसी को टारगेट करना नहीं है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भी दिल्ली से कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में साफ लिखा है कि सभी शिक्षण संस्थानों में आधुनिक शिक्षा होनी चाहिए। चाहे वो मदरसा हो, गुरुकुल हो या कॉन्वेंट स्कूल। भाजपा का तर्क है कि इससे मुस्लिम छात्रों को मुख्यधारा में लाया जा सकेगा।

 विपक्ष का विरोध

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा "ये सरकार मदरसों की आड़ में अल्पसंख्यकों को डराना चाहती है।" कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा "पहले सरकारी स्कूलों में शिक्षक और बेंच तो दे दो। मदरसों को बाद में देखना।" ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख ने कहा कि ये संविधान के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन है। अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपने शिक्षण संस्थान चलाने का अधिकार देता है।

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड का पक्ष

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में 16,513 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। इनमें 20 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। बोर्ड ने बताया कि 2018 से "मदरसा आधुनिकीकरण योजना" चल रही है। इसके तहत 2000 मदरसों में कंप्यूटर प्रयोगशाला और विज्ञान के शिक्षक दिए जा चुके हैं। बोर्ड का कहना है "हम सरकार के साथ हैं। लेकिन जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए। अगर सरकार फंड और ट्रेनिंग दे तो हम खुद आधुनिक शिक्षा लागू करेंगे। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शिक्षा विभाग के प्रो. फरहत हुसैन कहते हैं "मदरसों को आधुनिक बनाना अच्छी बात है। लेकिन तरीका संवाद का होना चाहिए। पुलिसिया निरीक्षण से माहौल खराब होगा।" दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद का कहना है "समस्या मदरसे नहीं हैं। समस्या ये है कि सरकारी स्कूलों की हालत खराब है। इसलिए लोग मदरसों की तरफ जाते हैं।" ये बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से 18 महीने पहले आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी इसके जरिए 2 संदेश देना चाहती है। पहला मुस्लिम समुदाय को "विकास" का संदेश। दूसरा अपने कोर वोटर को "सख्ती" का संदेश। मदरसों में सुधार की जरूरत है इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन सुधार डंडे से नहीं, संवाद और संसाधन से होगा। अगर सरकार सच में चाहती है कि मदरसों के बच्चे डॉक्टर-इंजीनियर बनें तो उसे फंड, शिक्षक और इंफ्रास्ट्रक्चर देना होगा। केशव मौर्य के बयान ने बहस शुरू कर दी है। अब देखना है इसका नतीजा क्या निकलता है। 

 

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