एमपीएससी परीक्षा विवाद पर सरकार का बड़ा फैसला, आईएएस तुकाराम मुंढे बने समिति के सचिव
समिति का गठन किया है। तुकाराम मुंढे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिलीप भोसले समिति के अध्यक्ष होंगे। इस बीच, एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद, पुणे में एमपीएससी उम्मीदवारों का पिछले 10 दिनों से चल रहा आंदोलन समाप्त कर दिया गया है।
पुणे में उम्मीदवारों ने कथित पेपर लीक, एमपीएससी परीक्षा में अनियमितताओं और आयोग के कामकाज में सुधार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को उनके पद से हटाया जाए या वे इस्तीफा दें।
राज्य सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति के अध्यक्ष के रूप में पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को नियुक्त किया गया है, जबकि वरिष्ठ सिविल सेवक तुकाराम मुंढे को सचिव बनाया गया है। समिति में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व सिविल सेवक गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी.डी. नाइक भी शामिल हैं। समिति की मुख्य जिम्मेदारी एमपीएससी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं के साथ-साथ आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं की जांच करना और आयोग के कामकाज में आवश्यक सुधारों का सुझाव देना है।
जांच समिति के गठन के बाद, एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने घोषणा की कि जांच पूरी होने तक वे अवकाश पर रहेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने हमेशा आयोग की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और हितों को प्राथमिकता दी है और जांच जारी रहने तक पद पर न रहने का निर्णय लिया है।
प्रदर्शनकारियों की मांगों में पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई, आयोग के प्रशासनिक कामकाज में सुधार और ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने पर विचार करना शामिल था। इसके अलावा, उनकी मांगों में आंदोलन के कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना, अगले तीन वर्षों में 70,000 पदों पर भर्ती करना और जनवरी में होने वाली ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाना भी शामिल था।