सिद्धिविनायक मंदिर में 18 करोड़ का घोटाला? राज ठाकरे भड़के, बोले केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराए
3 अगस्त 2026 की दोपहर मुंबई के दादर में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के दफ्तर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में MNS प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना नेता सदा सर्वांकर ने मिलकर मुंबई के प्रभादेवी स्थित सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट पर 18 करोड़ रुपये के दान घोटाले का गंभीर आरोप लगाया। राज ठाकरे ने कहा कि देश के सबसे अमीर और सबसे ज्यादा दान देने वाले मंदिरों में से एक सिद्धिविनायक मंदिर में पिछले 3 सालों में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए पैसे में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। उन्होंने बताया कि मंदिर को हर साल करीब 200 से 250 करोड़ रुपये का दान मिलता है लेकिन 2022 से 2025 तक के ऑडिट रिपोर्ट को खंगालने पर 18.37 करोड़ रुपये का हिसाब ही नहीं मिल रहा है। राज ठाकरे के अनुसार दान पेटियों से निकाला गया पैसा ट्रस्ट के मुख्य बैंक खाते में जमा नहीं किया गया। बल्कि कुछ चुनिंदा ट्रस्टी और वरिष्ठ कर्मचारियों ने मिलकर "भंडारा", "मेडिकल कैंप" और "स्कूल निर्माण" के नाम पर फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपये निकाल लिए। इतना ही नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि इसी पैसे से 2 ट्रस्टियों ने पुणे और नासिक में बेनामी संपत्ति भी खरीदी है। सदा सर्वाधिक ने इस मौके पर कहा कि हम यहां राजनीति करने नहीं आए हैं बल्कि करोड़ों भक्तों की आस्था की रक्षा करने आए हैं। उन्होंने तुरंत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को कड़ी सजा मिले।
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट का जवाब और सफाई क्या थ
राज ठाकरे के आरोपों के कुछ ही घंटों बाद सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और मशहूर अभिनेता आदेश बांदेकर ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट पूरी तरह पारदर्शी तरीके से काम करता है और हर साल दुनिया की बड़ी एडिटिंग कंपनी EY से इसका ऑडिट कराया जाता है। आदेश बांदेकर ने बताया कि राज ठाकरे जो 18 करोड़ रुपये का जिक्र कर रहे हैं वो गायब नहीं है बल्कि वो "अनस्पेंट फंड" है यानी वो पैसा भी खर्च नहीं हुआ है और ट्रस्ट के पास सुरक्षित है। उन्होंने ये भी सफाई दी कि कोरोना महामारी के दौरान ट्रस्ट ने करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए थे। ये पैसा ऑक्सीजन प्लांट लगाने, गरीब मरीजों का इलाज कराने और जरूरतमंदों को खाना खिलाने में इस्तेमाल किया गया था। शायद राज ठाकरे को उसका हिसाब समझ नहीं आया। ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि ये सब चुनाव से पहले मंदिर की छवि खराब करने की एक सोची-समझी राजनीति साजिश है। ट्रस्ट ने ये भी कहा कि हर महीने मंदिर की वेबसाइट पर आय और खर्च का पूरा ब्यौरा डाला जाता है। अगर किसी को शक है तो वो वहां जाकर देख सकता है। आखिर में ट्रस्ट ने राज ठाकरे पर मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी भी दी।
पुलिस, सरकार और कानूनी प्रक्रिया अब तक कहां पहुंची
राज ठाकरे की शिकायत के बाद मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने तुरंत हरकत में आते हुए FIR नंबर 384/2026 दर्ज कर ली। इस FIR में भारतीय दंड संहिता की धारा 406 यानी आपराधिक विश्वासघात, धारा 420 यानी धोखाधड़ी और धारा 120B यानी आपराधिक साजिश लगाई गई हैं। पुलिस ने जांच शुरू करते ही सबसे पहले मंदिर ट्रस्ट के 6 बैंक खातों को सीज कर दिया। साथ ही पिछले 3 साल का सीसीटीवी फुटेज, दान पेटी का रजिस्टर और सभी बिल वाउचर जब्त कर लिए गए हैं। अब तक पुलिस ने 4 वरिष्ठ ट्रस्टी से पूछताछ भी की है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। अगर एक रुपये की भी गड़बड़ी पाई गई तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जेल भेजा जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मंदिर "सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम 1950" के तहत आते हैं। अगर जांच में घोटाला साबित होता है तो ट्रस्टियों को 7 साल तक जेल हो सकती है, पूरी रकम ब्याज सहित वापस करनी पड़ सकती है और यहां तक कि ट्रस्ट को भंग भी किया जा सकता है। हालांकि सीबीआई जांच तभी शुरू होगी जब राज्य सरकार या उच्च न्यायालय के आदेश देगा।
आम जनता, भक्तों और सोशल मीडिया की क्या प्रतिक्रिया रही
जैसे ही ये खबर सामने आई पूरे मुंबई और सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। ट्विटर पर #SiddhivinayakScam 48 घंटे तक ट्रेंड करता रहा। मंदिर आने वाले आम भक्तों में गुस्सा और निराशा दोनों देखी गई। कई लोगों ने कहा कि हम भगवान को पैसा इसलिए चढ़ाते हैं ताकि वो गरीबों के इलाज, अनुदान और शिक्षा में लगे। अगर वो पैसा ट्रस्ट खा जाएंगे तो हम किस पर भरोसा करेंगे। एक भक्त ने भावुक होकर कहा "मैं हर महीने 500 रुपये का नोट चढ़ाता था। अब लगता है वो नोट शराब की बोतल में बदल गया होगा।" वहीं कुछ लोगों ने राज ठाकरे पर भी सवाल उठाए और कहा कि वो सिर्फ सुर्खियों में आने के लिए ऐसा कर रहे हैं। मंदिर के बाहर कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने "ऑडिट सार्वजनिक करो" के पोस्टर भी लगाए। ये मामला सिर्फ पैसे का नहीं रह गया है। ये अब आस्था बनाम भ्रष्टाचार की लड़ाई बन गई है। लोग मांग कर रहे हैं कि तिरुपति, वैष्णो देवी और सोमनाथ जैसे सभी बड़े मंदिरों का ऑडिट CAG से कराया जाए और दान में पूरी पारदर्शिता लाई जाए।
निष्कर्ष और आगे का रास्ता - समाधान क्या हो सकता है
सिद्धिविनायक मंदिर सिर्फ ईंट और पत्थर की इमारत नहीं है। ये मुंबई की पहचान है और लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि सरकार सख्त कदम उठाए। पहला, सभी बड़े मंदिरों का ऑडिट हर साल CAG यानी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक से कराया जाए। दूसरा, दान पेटियों पर QR कोड और UPI को अनिवार्य किया जाए ताकि हर पैसे का डिजिटल रिकॉर्ड रहे। तीसरा, ट्रस्टियों की नियुक्ति 3 साल के लिए की जाए और उनका कार्यकाल खत्म होने पर सामाजिक ऑडिट हो। चौथा, ट्रस्ट की वेबसाइट पर हर खर्च को लाइव अपडेट किया जाए। राज ठाकरे के आरोप सही हैं या गलत इसका फैसला जांच के बाद ही होगा। लेकिन इतना तय है कि अगर मंदिरों में भी भ्रष्टाचार होगा तो लोगों का भगवान से भरोसा उठ जाएगा। इसलिए जरूरी है कि भक्तों का पैसा सीधा भगवान की सेवा में लगे न कि किसी बिचौलिए या ट्रस्ट की जेब में जाए।