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उत्तराखंड चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, 17 गैर मान्यता प्राप्त पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

05 Aug, 2026 14


 उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। आयोग ने 17 गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को नोटिस जारी करके उनका रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग का कहना है कि ये दल पिछले कई चुनावों में हिस्सा नहीं ले रहे थे और सिर्फ कागजों पर अस्तित्व में थे। चुनाव आयोग के सचिव ने बताया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत ये कार्रवाई की गई है। अब इन दलों का नाम मतदाता सूची और चुनाव चिन्ह की सूची से भी हटा दिया जाएगा।

 आखिर क्यों रद्द हुआ 17 पार्टियों का रजिस्ट्रेशन

चुनाव आयोग ने 3 महीने पहले सभी पंजीकृत दलों से रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में पता चला कि 17 दल पिछले विधानसभा चुनाव 2022, लोकसभा चुनाव 2024 और पंचायत चुनाव में भी अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतार पाए आयोग के नियम के अनुसार अगर कोई राजनीतिक दल लगातार 2 चुनावों में हिस्सा नहीं लेता तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। इन 17 दलों को 15 दिन पहले कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया था, लेकिन किसी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। आयोग का मानना है कि ऐसे फर्जी दल चुनाव प्रक्रिया को गुमराह करते हैं और सरकारी मशीनरी पर बोझ बढ़ाते हैं।

 कौन सी हैं वो 17 पार्टियां - पूरी लिस्ट

चुनाव आयोग ने अभी सभी 17 दलों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसमें ज्यादातर क्षेत्रीय और एक मुद्दे वाली पार्टियां हैं। कुछ दलों के नाम इस प्रकार बताए जा रहे हैं:

1. उत्तराखंड जन क्रांति पार्टी
2. पर्वतीय विकास दल
3. हिमालय सेवा समिति
4. देहरादून लोकतांत्रिक मोर्चा
5. गढ़वाल किसान पार्टी

बाकी 12 दलों की लिस्ट आयोग की वेबसाइट पर जल्द अपलोड की जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि अगर कोई दल 30 दिन के अंदर कोर्ट से स्टे ले आता है तो उसका नाम बहाल हो सकता है।

 मतदाता सूची और चुनाव चिन्ह पर क्या असर पड़ेगा

इस फैसले का सबसे बड़ा असर मतदाता सूची पर पड़ेगा। अभी तक EVM मशीन में इन दलों के लिए अलग-अलग चुनाव चिन्ह आरक्षित थे। अब वो सभी चिन्ह फ्री हो जाएंगे और नए दलों को दिए जा सकते हैं दूसरा, इन दलों के पदाधिकारी अब सरकारी सुविधाएं जैसे कार्यालय, चुनाव के समय प्रचार के लिए सरकारी जगह नहीं मांग पाएंगे राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इससे छोटे दलों के कार्यकर्ता अब बड़ी पार्टियों में शामिल हो सकते हैं।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया क्या है

भाजपा और कांग्रेस दोनों ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा "पारदर्शिता के लिए यह जरूरी कदम था"। कांग्रेस ने कहा "फर्जी दलों की वजह से असली मुद्दे दब जाते थे लेकिन कुछ छोटे दलों ने विरोध किया है। एक दल के अध्यक्ष ने कहा "कोरोना और बाढ़ की वजह से हम चुनाव नहीं लड़ पाए, इसका मतलब यह नहीं कि हमारा अस्तित्व ही खत्म कर दिया जाए"।

 क्या है जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A

इस धारा के तहत कोई भी संगठन चुनाव आयोग में राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण करवा सकता है। लेकिन शर्त है कि उसे चुनाव लड़ना होगा और हर साल आय-व्यय का ब्यौरा देना होगा। अगर कोई दल 6 साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ता या 

रिपोर्ट नहीं देता तो आयोग उसका पंजीकरण रद्द कर सकता है। उत्तराखंड में यही नियम लागू किया गया है।

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