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नीट पेपर लीक के दोषियों की खैर नहीं! बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 6 महीने में फैसला सुनाने का दिया आदेश

04 Aug, 2026 16

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 4 अगस्त 2026 को देश के लाखों मेडिकल छात्रों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को सख्त निर्देश दिए कि 2024 के नीट पेपर लीक मामले से जुड़े सभी केसों के निपटारे के लिए 25 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें तुरंत गठित की जाएं। और इन सभी मामलों को 6 महीने के अंदर निपटाना होगा। ये आदेश उस समय आया जब पेपर लीक को 2 साल से ज्यादा हो चुके थे, लेकिन अभी तक आरोपियों पर ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ था। 2024 में नीट यूजी की परीक्षा देशभर में 5 मई को होनी थी। लेकिन परीक्षा से 48 घंटे पहले बिहार, गुजरात और राजस्थान में पेपर लीक की खबरें आने लगीं। जांच में पता चला कि एक संगठित गिरोह ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के कर्मचारियों को पैसे देकर पेपर निकलवाया और उसे 30-40 लाख रुपये में बेचा। इस रैकेट में 200 से ज्यादा लोग शामिल थे। कोचिंग संचालक, दलाल, प्रिंसिपल और यहां तक कि कुछ अभिभावक भी। अनुमान है कि 5000 से ज्यादा छात्रों ने पैसा देकर पेपर खरीदा। सबसे दर्दनाक बात ये रही कि जिन छात्रों ने 2-3 साल मेहनत की थी, उनके नंबर कम आ गए। 12 छात्रों ने आत्महत्या कर ली।

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा "ये सिर्फ परीक्षा में धांधली नहीं है। ये देश के भविष्य के डॉक्टरों के साथ धोखा है।" अदालत ने 5 बड़े निर्देश दिए:

  1. पहला, महाराष्ट्र सरकार 30 दिन के अंदर 25 फास्ट ट्रैक अदालतों के लिए न्यायाधीश, विशेष सरकारी वकील और स्टाफ नियुक्त करे।
  2. दूसरा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी 2 महीने में अपनी सुरक्षा व्यवस्था की पूरी रिपोर्ट जमा करे। अदालत ने कहा कि अब पेपर प्रिंटिंग से लेकर सेंटर तक जीपीएस और सीसीटीवी अनिवार्य होगा।
  3. तीसरा, सभी कोचिंग संस्थानों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए। जो कोचिंग "100% सिलेक्शन गारंटी" का दावा करे उस पर सख्त कार्रवाई हो।
  4. चौथा, 2024 में प्रभावित हुए सभी छात्रों को मुफ्त में काउंसलिंग और एक बार फिर बिना फीस के परीक्षा देने का विकल्प दिया जाए।
  5. पांचवां, केंद्र सरकार 3 महीने में "सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम" को और सख्त करे।


छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद सोशल मीडिया पर #JusticeForNEETStudents ट्रेंड करने लगा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कहा "देर से ही सही, लेकिन इंसाफ की उम्मीद जगी है।" पटना के एक छात्र के पिता ने कहा "मेरा बेटा 2 साल से डिप्रेशन में था। उसे लगता था कि मेहनत करने का कोई फायदा नहीं। अब उसे लग रहा है कि सिस्टम में अभी न्याय बचा है।" राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक ने कहा कि 2025 से नए नियम लागू कर दिए गए हैं। अब पेपर 3 लेयर की सिक्योरिटी में आएंगे और ट्रांसपोर्ट के समय जीपीएस ट्रैकिंग होगी। महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि वो अदालत के आदेश का अक्षरशः पालन करेगी। 25 नई अदालतों के लिए जगह और बजट जारी कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का कहना है "ये फैसला नजीर बनेगा। अगर 6 महीने में सजा हो जाती है तो भविष्य में कोई भी पेपर लीक करने की हिम्मत नहीं करेगा। अब सभी की निगाहें इन 25 फास्ट ट्रैक कोर्ट पर हैं। अगर ये समय पर काम कर गए तो राजस्थान, बिहार और यूपी में भी ऐसे कोर्ट बनाने की मांग उठेगी। परीक्षा सिर्फ एक टेस्ट नहीं होती। वो एक गरीब किसान के बेटे का सपना होती है। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने दिखा दिया कि न्यायपालिका छात्रों के साथ खड़ी है। अब सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी कि 2026 में कोई भी छात्र ये न कहे कि "मेरी मेहनत बिक गई।" 

 

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