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आयुष्मान भारत योजना में मुर्दों ने भी करवाया इलाज

10 Aug, 2023 606

संवाददाता/in24 न्यूज़.
आयुष्मान भारत योजना में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि इस योजना के तहत ऐसे मरीज भी लाभ उठा रहे हैं, जिन्हें पहले मृत दिखाया गया था। यहीं नहीं स्कीम के नौ लाख से ज्यादा लाभार्थी तो सिर्फ एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े हुए पाए गए हैं। ऑडिट में सबसे बड़ी खामी यह उजागर हुई है कि इस योजना के तहत ऐसे मरीज इलाज करा रहे हैं, जिन रोगियों को पहले ‘मर गया’ दिखाया गया था, लेकिन मरने के बाद भी वे इलाज कराते रहे। टीएमएस में मृत्यु के मामलों के डाटा को एनालाइज करने से पता चला कि आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार के दौरान 88,760 रोगियों की मृत्यु हो गई। इन रोगियों के संबंध में नए इलाज से संबंधित कुल 2,14,923 दावों को सिस्टम में भुगतान के रूप में दिखाया गया है. ऑडिट रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उपरोक्त दावों में शामिल करीब 3,903 मामलों के क्लेम की राशि का भुगतान अस्पतालों को किया गया। इनमें 3,446 मरीजों से संबंधित पेमेंट 6.97 करोड़ रुपए का था। मरे हुए व्यक्तियों के इलाज का क्लेम करने के सबसे ज्यादा मामले देश के पांच राज्यों में देखने को मिले हैं। इनमें छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, केरल और मध्य प्रदेश शामिल हैं।ऑडिट में डाटा एनालाइज करते हुए यह भी पता चला कि इस योजना के एक ही लाभार्थी को एक ही समय में कई अस्पतालों में भर्ती किया गया। जांच में सामने आया है कि डाटाबेस में 48,387 मरीजों के 78,396 दावे पाए गए, जिसमें पहले के इलाज के लिए इन मरीजों की छुट्टी की तारीख, उसी मरीज के दूसरे इलाज के लिए अस्पताल में एंट्री की तारीख के बाद की थी। ऐसे मरीजों में 23,670 पुरुष मरीज शामिल हैं। आयुष्मान भारत योजना को लेकर कैग की ऑडिट रिपोर्ट में एक और बड़ा खुलासा करते हुए महालेखा परीक्षक ने बताया है कि इस योजना के तहत लाभ लेने वाले लाखों लाभार्थी ऐसे हैं, जो एक मोबाइल नंबर पर रजिस्टर्ड हैं। आमतौर पर किसी लाभार्थी का मोबाइल नंबर गलत निकलता है या फिर ई-कार्ड खो जाता है, तो लाभार्थी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है और फिर योजना के दायरे में आने वाले अस्पताल इलाज देने से इनकार कर देते हैं, लेकिन यहीं बड़ी धांधली की गई है। पीएमजेएवाई डाटाबेस के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला एक ही मोबाइल नंबर पर कई लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। सिर्फ तीन नंबर पर लगभग 9.85 लाख लोग रजिस्टर्ड हैं। मोबाइल नंबर 9999999999 पर 7.49 लाख लोग पीएमजेएवाई योजना के तहत लाभार्थियों के रूप में रजिस्टर्ड हैं। कैग की ओर से जांच में यह भी सामने आया है कि इस धांधली के लिए सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले अन्य नंबरों में 8888888888, 9000000000, 20, 1435 और 185397 शामिल हैं। कैग की इस ऑडिट रिपोर्ट को संसद में तब पेश किया गया, जब स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने एक लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया कि सरकार पीएमजेएवाई के तहत संदिग्ध लेनदेन और संभावित धोखाधड़ी का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल रह रही है। बघेल ने कहा कि इन प्रौद्योगिकियों का उपयोग स्वास्थ्य देखभाल धोखाधड़ी की रोकथाम, पता लगाने और निवारण के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि पहली अगस्त, 2023 तक आयुष्मान भारत योजना के तहत कुल 24.33 करोड़ कार्ड बनाए गए हैं। कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ हिमाचल प्रदेश सहित चंडीगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में कई पेंशनभोगी उठा रहे हैं। तमिलनाडु सरकार के पेंशनभोगी डेटाबेस की इस योजना के डाटाबेस से तुलना करने पर पता चला कि 1,07,040 पेंशनभोगियों को लाभार्थियों के रूप में शामिल किया गया था। इन लोगों के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बीमा कंपनी को करीब 22.44 करोड़ रुपए का प्रीमियम भुगतान किया गया। ऑडिट में पता चला कि अयोग्य लोगों को हटाने में देरी के चलते बीमा प्रीमियम का भुगतान हुआ था। बता दें कि इस तरह के भ्रष्टाचार से आयुष्मान भारत योजना पाए सवाल उठने लगे हैं।

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