किसानों के नाम पीएम मोदी का इशारा
संवाददाता/in24 न्यूज़.
कृषि कानून के विरोध के नाम पर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है. इसपर विपक्ष और अन्य दलों द्वारा सियासत भी शुरू है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि भारत ने 2020 में उतार-चढ़ाव देखे, पर अब स्थितियां उम्मीद से अधिक तेजी से बेहतर हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी उद्योग मंडल फिक्की के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा आज अर्थव्यवस्था के संकेत हौसला बढ़ाने वाले हैं। संकट के समय देश ने जो सीखा है, उसने भविष्य के संकल्पों को और दृढ़ किया है। पीएम मोदी ने कहा कि चाहे एफडीआई हो या एफपीआई, विदेशी निवेशकों ने भारत में रिकॉर्ड निवेश किया है। भारत ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान लोगों की प्राण रक्षा को प्राथमिकता दी। उस दिशा में नीतियां बनाईं, फैसले किए। हाल में हुए कृषि सुधारों से किसानों को नए बाजार मिलेंगे, नए विकल्प मिलेंगे, प्रौद्योगिकी का ज्यादा लाभ मिलेगा। कृषि क्षेत्र में ज्यादा निवेश होगा और इसका सबसे ज्यादा फायदा किसानों को होने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि देश का किसान समृद्ध होगा तो देश समृद्ध होगा। आज का ग्रामीण भारत बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कृषि कानून से कृषि में निवेश के अवसर बढ़ेंगे। गांव में रहने वालों की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं। देश की मंडियों का आधुनिकीकरण हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि फरवरी-मार्च से जब हालात शुरू हुए थे, तब हम अज्ञात दुश्मन से लड़ रहे थे। सवाल यही था कि कब तक ऐसा चलेगा? कैसे सब ठीक होगा? इन्हीं सवालों, चुनौतियों, चिंताओं से दुनिया का हर मानव फंसा पड़ा था। लेकिन आज दिसंबर आते-आते स्थिति बहुत बदली नजर आ रही है। हमारे पास जवाब भी है और रोडमैप भी है। आज जो आर्थिक संकेतक हैं, वो उत्साह बढ़ाने वाले हैं। हौसला बढ़ाने वाले हैं। संकट के समय जो देश ने सीखा है, उसने भविष्य के संकल्पों को और दृढ़ किया है। इसका बहुत ज्यादा श्रेय एंटरप्रेन्योर्स, किसानों, उद्यमियों और देशवासियों को जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में विदेशी निवेशकों ने रिकार्ड इनवेस्टमेंट किया है। आज देश का प्रत्येक नागरिक आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। लोकल के लिए वोकल होकर काम कर रहा है। देश को अपने प्राइवेट सेक्टर के सामर्थ्य पर इतना विकास है। भारत का प्राइवेट सेक्टर न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकता है, ग्लोबली भी अपनी पहचान और मजबूती से स्थापित कर सकता है। पीएम मोदी की बातों को यदि किसान वाकई समझने की कोशिश करेंगे तो आंदोलन के रास्ते पर चलने से वे बचेंगे.