मिडिल ईस्ट संकट के बीच पीएम मोदी की अपील, राहुल, अखिलेश और आरजेडी ने बोला हमला
11 May, 2026
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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन बचाने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था को फिर से शुरू करने, गैर-जरूरी वस्तुओं की खरीदारी और विदेश यात्राओं से बचने की अपील की है। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से पैदा हुए वैश्विक संकट से निपटने के लिए विदेशी मुद्रा को बचाने पर जोर दिया। वहीं पीएम मोदी की अपील पर सियासत शुरू हो गई है। खासकर विपक्षी नेताओं ने पीएम की अपील पर सवाल उठाया है।
आरजेडी नेता मनोज झा ने कहा कि देश की जनता को उपदेश देने की जरुरत नहीं है। पूर्व सांसद माजिद मेमन ने पीएम की अपील पर तंज कसते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जंग की शुरुआत से ही ये संकट बना हुआ था लेकिन तब चुनाव होने थे जिसके चलते ने पीएम ने देश को संकट के बारे में नहीं बताया। अब जब चुनाव हो गए है लिहाजा ऐसी बातें शुरू कर दी है। शिवसेना उद्धव गुट की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी तंज कसा है। उन्होंने कहा कि 12 मई को असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण का कार्यक्रम है. उम्मीद करती हूं। वहीं से वॉच फ्रॉम होम की शुरुआत होगी।
वहीं कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री चाहते हैं कि हम तेल- यानी पेट्रोल और डीजल- का इस्तेमाल कम करें और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, तो उन्हें अपने सभी मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उनके मंत्रियों वगैरह से कहना चाहिए कि वे काफिलों का इस्तेमाल न करें. इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि सभी सरकारी अधिकारियों को सिर्फ सार्वजनिक परिवहन का ही इस्तेमाल करना चाहिए। आपको बता दें कि पीएम ने अपनी अपील में कहा कि कम से कम एक साल तक किसी भी कार्यक्रम या शादी के लिए सोना न खरीदें, पेट्रोल और डीजल का कम उपयोग करें और निजी वाहनों की जगह मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें, छुट्टियां मनाने या विदेशों में शादी करने के बजाय घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें।
निजी वाहनों का उपयोग अनिवार्य होने पर कार पुल करने का प्रयास करें, विदेशी मुद्रा बचाने के लिए खाद्य तेल के विवेकपूर्ण उपयोग करें, माल ढुलाई के लिए सड़क के बजाय रेलवे का अधिक उपयोग करें। वहीं पीएम की अपीलों पर पलटवार करते हुए लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने अपीलों को उपदेश नहीं, बल्कि नाकामी के सबूत बताया। राहुल गांधी ने कहा कि 12 साल के शासन के बाद देश को ऐसे मोड़ पर ला दिया गया है जहां जनता को बताया जा रहा है कि वे क्या खरीदें और क्या नहीं। उन्होंने पीएम को कॉम्प्रोमाइज पीएम कहते हुए आरोप लगाया कि वे जिम्मेदारी जनता पर डाल रहे हैं।
वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को संकट की याद क्यों आई। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी अपीलों से बाजार में डर और घबराहट फैल सकती है। इसके अलावा कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने अपील को शर्मनाक और अनैतिक करार देते हुए कहा कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है और अब आम नागरिकों को मुश्किल में डाल रही है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी अपीलों की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही पीएम को संकट क्यों याद आया।
हालांकि बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि ये कदम एहतियात के तौर पर उठाने की अपील की जा रही है ताकि वैश्विक संघर्षों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर रहे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वैश्विक संकट पर की गई 7 अपीलों पर कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार को तुरंत संसद का सत्र बुलाना चाहिए, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए की गई सात अपीलों के बारे में देश को जानकारी दी जा सके। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के कार्यालय से बहुत गंभीर निर्देश आए हैं इनका कारण क्या है? उन्होंने कहा सरकार को तुरंत संसद का सत्र बुलाना चाहिए, देश को भरोसे में लेना चाहिए और हमें मौजूदा हालात की असलियत के बारे में बताना चाहिए, जिनकी वजह से ये अपील करना जरूरी हो गया है।