नवरात्रि के मौके पर सियासी बवाल, वीएचपी ने जारी किया फरमान
महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश तक गरबा पंडालों में गैर हिंदुओं की एंट्री पर बवाल मचा हुआ है तो वहीं राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक नॉनवेज बिक्री पर रोक लगाने को लेकर सियासी संग्राम जारी है। गरबा पंडालों में गैर हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने के लिए हिंदू संगठनों ने निर्देश जारी किए हैं।
विश्व हिंदू परिषद के मुताबिक पंडालों में प्रवेश करने वाले लोगों को माथे पर तिलक लगाना होगा, हाथ में रक्षा सूत्र बांधना होगा, और देवी की पूजा करनी होगी। साथ ही, उन पर गोमूत्र का छिड़काव भी किया जाएगा। इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की तस्वीर लगाई जाएगी और पंडाल में प्रवेश करने वालों को पहले उनकी पूजा करनी होगी, तब ही प्रवेश कर पाएंगे।
इन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी के लिए वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ता गरबा मंडलों पर नजर रखेंगे। वहीं मध्य प्रदेश में भी हिंदू संगठनों ने ऐसे ही फरमान जारी किए है। जिसका बीजेपी नेताओं और विधायकों ने समर्थन किया है।
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने गरबा कार्यक्रमों को लेकर कहा कि नवरात्र के दौरान गरबा कार्यक्रम 'लव जिहाद के केंद्र' बन रहे हैं। राणे ने विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजकों को प्रतिभागियों के पहचान दस्तावेजों की जांच करने के सुझाव का समर्थन किया है।
इसके अलावा बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गरबा आयोजन में गैर-हिंदुओं पर रोक का मुद्दा उठाया और कहा कि जब सनातनी हिन्दू विचारधारा के लोग हज पर नहीं जाते तो उन्हें यानी मुस्लिम समुदाय को भी गरबा में शामिल नहीं होना चाहिए।
एक तरफ जहां बीजेपी और हिंदूवादी संगठन इसका समर्थन कर रहे हैं तो वहीं विपक्ष नेताओं ने धर्म और आस्था की आड़ में सियासत करने, समाज में एकता को तोड़ने और हिंदू-मुस्लिम विवाद को बढ़ाने का आरोप लगाया है। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, बीजेपी शिवसेना यूबीटी और एआईएमआईएम समेत कई विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर हमला बोला है। दरअसल विपक्ष ने सवाल उठाया है कि बड़े होटलों में मांस और शराब परोसा जा रहा है तो उसे क्यों नहीं रोका जा रहा। कुल मिलाकर नवरात्री शुरू होते ही विवादों भी शुरू हो गए हैं और सनातन का अघोषित कोड और कंडक्ट भी लागू हो गया है।