ट्रंप बोले- ईरान से टकराव महंगा पड़ेगा, समझौता ही आखरी रास्ता है
हमें युद्ध नहीं, डील चाहिए"
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहता, बल्कि एक समझौता चाहता है। उनका कहना है कि टकराव से किसी का फायदा नहीं होगा और बातचीत से ही रास्ता निकल सकता है। ये बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार के समय में भी ईरान पर दबाव था, लेकिन मकसद हमेशा डील करना था, युद्ध करना नहीं। उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिका और ईरान बैठकर बात करें तो परमाणु मुद्दे और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों का हल निकल सकता है। ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति दोनों में चर्चा तेज हो गई है।
ट्रंप ने कब दिया ये बयान
ट्रंप ने ये बयान अगस्त 2026 में एक रैली और मीडिया इंटरव्यू के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रशासन को भी ईरान के साथ कड़ाई के साथ-साथ बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। ट्रंप ने 2018 में परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग करने का फैसला लिया था, लेकिन अब वो कह रहे हैं कि एक नया और बेहतर समझौता होना चाहिए। उनके मुताबिक युद्ध महंगा भी है और खतरनाक भी। 2026 में राष्ट्रपति चुनाव नजदीक हैं और विदेश नीति एक बड़ा मुद्दा बन गई है। ऐसे में ट्रंप का ये बयान उनके चुनावी नैरेटिव का हिस्सा भी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को दुनिया में शांति का अगुवा बनना चाहिए, न कि हर जगह युद्ध में उलझना चाहिए।
बयान का असर कहां-कहां पड़ेगा
ट्रंप का ये बयान अमेरिका के साथ-साथ ईरान, इजरायल और पूरे मध्य पूर्व पर असर डालेगा। ईरान ने अभी तक ट्रंप के बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान भी बातचीत के लिए दरवाजा बंद नहीं करना चाहेगा। इजरायल की तरफ से हमेशा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई जाती रही है। अगर अमेरिका डील की तरफ जाता है तो इजरायल की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं। यूरोपीय देश भी इस बयान को ध्यान से देख रहे हैं क्योंकि वो पहले से ही ईरान के साथ बातचीत बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उनकी नीति "पीस थ्रू स्ट्रेंथ" की है यानी ताकत के साथ शांति। इसलिए अमेरिका को कमजोर दिखे बिना डील करनी होगी।
युद्ध क्यों नहीं और डील क्यों जरूरी
ट्रंप ने तर्क दिया कि युद्ध से न अमेरिका को फायदा होगा न दुनिया को। ईरान के साथ सीधा टकराव तेल की कीमतें बढ़ा देगा, बाजार हिल जाएगा और हजारों जानें जा सकती हैं। इसलिए बेहतर है कि प्रतिबंध और दबाव के साथ-साथ बातचीत भी चलती रहे। ट्रंप ने कहा कि एक अच्छी डील में ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना होगा, मिसाइल कार्यक्रम पर लगाम लगानी होगी और क्षेत्र में आतंकी समूहों को समर्थन बंद करना होगा। बदले में अमेरिका कुछ प्रतिबंध हटा सकता है। ट्रंप ने ये भी कहा कि वो किसी कमजोर समझौते के पक्ष में नहीं हैं। डील ऐसी होनी चाहिए जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों की रक्षा करे। उनका ये बयान रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी बहस छेड़ देगा क्योंकि पार्टी के कुछ नेता ईरान के खिलाफ कड़ी लाइन के पक्ष में हैं।
फिलहाल ट्रंप का बयान एक राजनीतिक संदेश है। सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन 2026 के चुनाव से पहले विदेश नीति पर इस तरह के बयान अहम हो जाते हैं। अगर ट्रंप सत्ता में लौटते हैं तो ईरान नीति में बदलाव तय है। वो बातचीत को प्राथमिकता देंगे लेकिन दबाव भी बनाए रखेंगे। ईरान, अमेरिका और पूरे मध्य पूर्व की नजरें अब इस बात पर हैं कि आने वाले महीनों में कूटनीति किस दिशा में जाती है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनकी पहली पसंद युद्ध नहीं, समझौता है। अब गेंद ईरान और मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के पाले में है।