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महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमाने की कोशिश

30 Oct, 2025 155

मुंबई सहित राज्य के अनेक शहरों में पिछले कुछ दिनों से आय लव मोहम्मद, आय लव महादेव, आय लव श्रीराम, आयलव देवाभाऊ और आय लव बुलडोजर बाबा जैसे बड़े-बड़े पोस्टर अचानक दिखाई देने लगे हैं। शुरुआत में यह चलन केवल सामाजिक माध्यमों तक सीमित था, परंतु अब यह सीधे सड़कों पर उतर आया है और इसके राजनीतिक उपयोग की चर्चा बढ़ने लगी है। आने वाले कुछ महीनों में नगर निगम चुनाव घोषित होने की संभावना है, और चुनाव से पहले ही धार्मिक तथा राजनीतिक भावनाओं को भड़काने के प्रयास होने के संकेत मिल रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि कुछ समूह इस प्रकार के पोस्टरों के माध्यम से समाज में धार्मिक विभाजन पैदा करने का जानबूझकर प्रयास कर रहे हैं। मुंबई, नालासोपारा और उपनगरों में ऐसे पोस्टरों की संख्या अधिक बढ़ी है। नालासोपारा स्टेशन के बाहर आय लव मोहम्मद का बैनर अभी भी मौजूद है। इसके बाद प्रतिक्रिया के रूप में आय लव महादेव और आय लव श्रीराम लिखे पोस्टर भी लगाए गए। कुछ स्थानों पर आयलव बुलडोजर बाबा जैसे स्पष्ट रूप से राजनीतिक संदेश देने वाले पोस्टर दिखे, जिससे विवाद और बढ़ने की आशंका है।

चुनाव के समय धार्मिक भावनाएं भड़काने के ऐसे प्रयास नए नहीं हैं, लेकिन इस बार यह प्रवृत्ति सामाजिक माध्यमों से आगे बढ़कर सीधे शहर की दीवारों और मुख्य मार्गों तक पहुंच गई है। अनेक पोस्टर नाम सहित लगाए गए हैं, जबकि कुछ बिना किसी नाम के हैं। यह पोस्टर कौन लगा रहा है और इनके पीछे कौन सा समूह सक्रिय है, इसकी जांच की जा रही है। कई स्थानों पर महानगर पालिका और पुलिस ने बिना अनुमति लगे पोस्टर हटाए भी हैं, परंतु यह चलन अब फैलता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे पूरी तरह नियंत्रण रखना कठिन होता जा रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि बिना अनुमति धार्मिक या भड़काऊ आशय के पोस्टर लगाना कानूनन अपराध है। ऐसे पोस्टरों से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है और साम्प्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। इसी कारण सभी पुलिस थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सामाजिक माध्यमों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है, और भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने वालों पर कार्यवाही की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले समाज में कृत्रिम तनाव पैदा किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है चुनाव आते ही धार्मिक या भावनात्मक मुद्दों को उछाला जाता है। इससे विकास, पानी की समस्या, यातायात, स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे वास्तविक मुद्दे पीछे रह जाते हैं। नागरिकों ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि बिना अनुमति लगे सभी पोस्टर तुरंत हटाए जाएं और शहर में शांति बनाए रखी जाए। आगामी महानगरपालिका चुनाव में इस पूरे प्रकरण का राजनीतिक रूप से कैसे उपयोग होगा और प्रशासन स्थिति को कितनी प्रभावी ढंग से संभालता है। यह देखना महत्वपूर्ण रहेगा।

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