कोरोना वैक्सीन पर रूस में सामने आया मतभेद
संवाददाता/in24 न्यूज़.
हाल ही में रूस ने कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा किया था. खबर ये भी थी कि उसे स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंजूरी भी दे दी, मगर अब इस वैक्सीन को लेकर आपसी मतभेद सामने आये हैं. गौरतलब है कि दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने वाले रूस में इस विवाद जारी है. कई लोग इस वैक्सीन को जल्दी लॉन्च करने पर सवाल उठा रहे हैं. अब रूस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया है. एक रिपोर्ट के अनुसार रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय की एथिक्स काउंसिल से वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ प्रो. एलेक्जेंडर चुचैलिन ने इस्तीफा दे दिया है. रिपोर्ट के अनुसार 'स्पूतनिक वी’ वैक्सीन का जल्दी पंजीकरण करने से वह नाराज थे और इसे न रोक पाने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. प्रो. एलेक्जेंडर वैक्सीन की सुरक्षा और असर को सवालों के घेरे में खड़ा किया है. उन्होंने वैक्सीन बनाने वाली संस्था गमालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक व रूसी सेना में वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट कर्नल प्रो. सर्जी बोरिसेविक पर गंभीर आरोप लगते हुए कहा कि उन्होंने एकेडमिक्स और मानकों को दरकिनार कर वैक्सीन बनाई है. रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ पल्मोनोलॉजी को आगे बढ़ने में प्रो. एलेक्जेंडर का बड़ा योगदान माना जाता है. प्रो. एलेक्जेंडर सवाल उठाये हैं कि क्या वैक्सीन के लिए सभी मानक को पूरा किया है? उन्होंने कहा ऐसे में या टीका दुनिया केलिए हानिकारक हो सकता है. इससे पहले रूस की कोरोना वायरस टीके को लेकर जर्मनी का कहना था कि इस वैक्सीन के लिए पर्याप्त टेस्ट नहीं किये गए हैं. जर्मन स्वास्थ्य मंत्री जेन्स स्पैन ने बुधवार को कहा कि लक्ष्य सबसे पहले वैक्सीन बनाना नहीं बल्कि सुरक्षित वैक्सीन बनाना होना चाहिए. अंतिम परीक्षण पूरा होने से पहले मॉस्को द्वारा टीके को मंजूरी देने के फैसले ने कुछ विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है. जानकारों के मुताबिक यह लाखों लोगों का टीकाकरण शुरू करने के लिए खतरनाक हो सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली के निदेशक ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक उपयोग के लिए जारी किए जाने से पहले रूस के एंटी-कोरोना वायरस वैक्सीन की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. कई वैज्ञानिकों ने फेज 3 परीक्षणों से पहले वैक्सीन को पंजीकृत करने के बारे में चिंताएं जाहिर की हैं, जिन्हें पूरा करने में महीनों लगते हैं और हजारों लोगों की भागीदारी की आवश्यकता होती है. बता दें कि राष्ट्रपति पुतिन की बेटियों को भी कोरोना वैक्सीन लगाई गई थी.