चीन की तरफ जापान ने भी मोड़ी अपनी खतरनाक मिसाइलें
संवाददाता/in24 न्यूज़।
चीन का सीमा विवाद सिर्फ भारत के साथ ही नहीं बल्कि अन्य देशों के साथ भी उभर रहा है. 15 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में भारत के साथ झड़प के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ गया है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चीन, दक्षिण चीन सागर में अपनी गतिविधियों के अलावा, जापान और ताइवान के क्षेत्रों पर भी कब्ज़ा करना चाहता है. एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान ने इसके मद्देनजर 'ड्रैगन' को जवाब देने के लिए अपनी मिसाइलों को चीन की ओर सीमा पर तैनात कर दिया है. एशिया समाचार की एक रिपोर्ट के अनुसार जापान अपनी वायुसेना ताकत बढ़ा रहा है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन के युद्ध के इरादों के मद्देनजर जापान अपनी वायु रक्षा में वृद्धि कर रहा है. जापान इस साल जून तक चार सैन्य ठिकानों पर पैट्रियट पैक-3 एमएसई एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को तैनात करेगा. यूएस-जापान न्यूज के अनुसार पैक-3 एमएसई किसी भी हिट-टू-किल को काउंटर करने में सक्षम है. जापान में तैनात वर्तमान पैट्रियट पैक-3 की अधिकतम सीमा 70 किमी है और पैक-3 एमएसई के नए संस्करण में इसे बढ़ाकर 100 किमी कर दिया गया है. माना जा रहा है कि चीन पर चौतरफा हमला किया जा सकता है. अमेरिका भी लगातार चीन को चेतावनी देता आया है. बीते दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को कोरोना वायरस फैलाने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार माना था. दिसंबर 2017 में अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अमेरिका और इसके सहयोगी देशों के लिए पैट्रियट एडवांस्ड कैपेबिलिटी -3 और पीएसी-3 मिसाइलों को वितरित करने के लिए 944 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया था. भारतीय सशस्त्र बलों को प्रोत्साहन के रूप में केंद्र ने रविवार को 500 करोड़ का फंड हथियारों के अधिग्रहण के लिए दिया है. उड़ी हमले और पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट हवाई हमलों के बाद सशस्त्र बलों को इसी तरह की वित्तीय शक्तियां दी गईं.