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पुलिस स्टेशन में भाई ने की नाबालिग बहन से शादी

08 May, 2020 895

संवाददाता/in24 न्यूज़.
आज के दौर में कुछ ऐसी भी घटनाएं सामने आती हैं जिनपर एकदम से भरोसा करना कठिन सा लगता है. मगर यही सच है कि लोग अपने मतलब के लिए किसी और की चिंता नहीं करते। बता दें कि कोरोना वायरस की वजह से चल रहे लॉकडाउन के बीच सामाजिक मान मर्यादा को शर्मसार करने वाला एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां रिश्तों को ताक पर रखकर रोहतास जिले के करगहर प्रखंड के एक गांव में एक युवक ने घरवालों की नाराजगी के बावजूद अपनी नाबालिग बहन से शादी कर ली है। यह बाल विवाह थाने के परिसर स्थित मंदिर में पुलिस की मौजूदगी में हुआ है। मामला करगहर विधानसभा क्षेत्र के बड़हरी ओपी थाना परिसर का है, जहां चचेरे भाई-बहन की शादी कराई गई। बहन नाबालिग है जिसकी उम्र 13 साल है। और वह आठवीं कक्षा की छात्रा है। इस घटना के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, बड़हरी के एक गांव का 18 वर्षीय युवक छह माह पहले अपनी चचेरी बहन को बहला-फुसलाकर लेकर दिल्ली फरार हो गया था। वहीं दोनों ने शादी कर ली थी और पति-पत्नी की तरह रह रहे थे।  उस समय बदनामी के डर से घर वालों ने पुलिस में शिकायत नहीं की। जब लॉकडाउन के कारण दोनों के पास पैसे खत्म हो गए तो वापस दोनों अपने गांव आ गए। गांव पहुंचने पर दोनों के परिजन नाराज हो गए और घर में रखने से इनकार कर दिया। दोनों गांव में ही पति पत्नी के रूप में रहने लगे, लड़की गर्भवती हो गई। घरवाले दोनों के इस रिश्ते का विरोध कर रहे थे। इसके बाद दोनों थाने पहुंचे थे और अपनी सुरक्षा की मांग की थी। जिसके बाद थानाध्यक्ष ने उनकी बातें सुनकर परिजनों से बात की थी। थानाध्यक्ष हरेकृष्ण राय ने बताया कि दोनों के परिवार वालों को बुलाया और कानूनी बातें समझाईं और प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा लेकिन दोनों परिवार में से कोई भी केस दर्ज कराने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद दोनों के परिवार वाले शादी कराने के पक्ष में दिखे और फिर एक-दूसरे से अनुनय-विनती के बाद ओपी परिसर स्थित मंदिर में दोनों की शादी कराई गई, शादी में पुलिस भी मौजूद रही। शादी के बाद अपने-अपने बेटे-बेटी की गलती देख दोनों के पिता फफक कर रो पड़े। थाना परिसर में शादी के मामले पर सवाल पूछे जाने पर थानाध्यक्ष हरेकृष्ण राय ने कहा कि शादी थाना परिसर में नहीं कराई गई। हमने पहले एफआइआर दर्ज कराने को कहा था। थाने में शादी करने का निर्देश नहीं दिया था। लोगों ने गरीब परिवार का हवाला देकर उन्हें गांव ले जाने की बात कही थी। परिसर स्थित मंदिर में क्या हुआ, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।

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