झारखंड में छात्रों का बड़ा प्रदर्शन,परीक्षाओं को लेकर सरकार से टकराव
झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का आंदोलन लगातार बड़ा होता जा रहा है। रांची में सोमवार, 10 अगस्त को हजारों छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में विधानसभा की ओर मार्च करने निकले। छात्रों का कहना है कि झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कई परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। छात्र इन मामलों की निष्पक्ष जांच और जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप है, उन्हें रद्द करने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन कर रहे छात्रों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से विधानसभा की ओर मार्च शुरू किया। इससे पहले रविवार को सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का छठा दौर हुआ, लेकिन कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी। बातचीत के बाद छात्रों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मुख्य मांगों पर फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि छात्रों की ज्यादातर मांगों पर काम किया जा चुका है। सरकार ने दावा किया कि करीब 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं, लेकिन छात्र इस दावे से सहमत नहीं हैं। इसी मतभेद के कारण सोमवार का विधानसभा मार्च आंदोलन का बड़ा हिस्सा बन गया।
छात्रों की मुख्य मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच है। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी चाहते हैं कि इन मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराई जाए। इसके अलावा छात्र 2019 के बाद हुई झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कई परीक्षाओं को रद्द करने की मांग भी कर रहे हैं। इनमें संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा, कनिष्ठ अभियंता परीक्षा और स्नातकोत्तर शिक्षक भर्ती परीक्षा जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि जिन परीक्षाओं पर सवाल उठे हैं, उनमें केवल जांच का भरोसा देना काफी नहीं है, बल्कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए। छात्र परीक्षा से जुड़ी जानकारी को भी सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। इनमें अलग-अलग वर्गों की कटऑफ, उत्तर पुस्तिका और अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया पत्र जैसी जानकारी शामिल है। इसके साथ ही छात्र चाहते हैं कि राज्य में सरकारी भर्तियों के लिए एक तय भर्ती कैलेंडर बनाया जाए, ताकि अभ्यर्थियों को यह पता रहे कि कौन सी परीक्षा कब होगी और भर्ती प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। छात्रों का कहना है कि लंबे समय तक परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में देरी होने से हजारों युवाओं की तैयारी और भविष्य पर असर पड़ता है।
आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों के बीच बातचीत कई बार हो चुकी है। रविवार को हुई छठी बैठक से भी कोई रास्ता नहीं निकला। सरकार का कहना है कि उसने छात्रों की ज्यादातर मांगों को स्वीकार कर लिया है और भर्ती प्रक्रिया में सुधार से जुड़े कई कदम उठाए गए हैं। वहीं, छात्रों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं। खास तौर पर जिन परीक्षाओं को रद्द करने और जिन मामलों की जांच कराने की मांग की जा रही है, उन पर सरकार की तरफ से उनकी उम्मीद के मुताबिक फैसला नहीं आया है। इसी वजह से बातचीत के बाद छात्रों ने विधानसभा मार्च का फैसला लिया। आंदोलन में शामिल छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि मार्च शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। प्रशासन ने हालांकि विधानसभा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी। विधानसभा के आसपास करीब 750 मीटर के क्षेत्र में प्रतिबंध लगाए गए और रास्ते में बैरिकेड तथा तार लगाए गए। रांची के कई स्कूलों को भी सोमवार को बंद रखा गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर नजर रखी।
आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी छात्रों के साथ विधानसभा मार्च में शामिल हुए। वह कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी तबीयत खराब होने के बावजूद उन्होंने आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया और एंबुलेंस से प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद वह स्ट्रेचर के जरिए मार्च में आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि वह छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे। दूसरी तरफ, प्रशासन की तरफ से प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की अपील की गई है। पुलिस ने भी कहा है कि प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर स्थिति के अनुसार फैसला लिया जाएगा। सोमवार को मार्च के दौरान कुछ छात्र पुलिस बैरिकेड के ऊपर से आगे बढ़ने की कोशिश करते भी दिखाई दिए। इससे साफ है कि सरकार और छात्रों के बीच तनाव कम होने के बजाय फिलहाल बढ़ता नजर आ रहा है। हालांकि छात्र नेताओं ने कहा है कि आंदोलन का मकसद किसी तरह की हिंसा नहीं है और वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
इस पूरे मामले में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 10 अगस्त को प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए धनशोधन का मामला दर्ज किया है। इससे परीक्षा विवाद की जांच का दायरा और बढ़ सकता है। हालांकि इस कार्रवाई का छात्र आंदोलन पर आगे क्या असर पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है। फिलहाल छात्रों की मांग है कि परीक्षा से जुड़े मामलों की पूरी जांच हो और अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर सरकार के सामने चुनौती यह है कि छात्रों के साथ बातचीत के जरिए ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे आंदोलन खत्म हो सके और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भरोसा दोबारा कायम हो। अभी तक हुई बैठकों में सहमति नहीं बनने के बाद सोमवार का विधानसभा मार्च छात्रों के आंदोलन का अहम पड़ाव बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार छात्रों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और जांच से क्या सामने आता है, इस पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल छात्र आंदोलन जारी है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकलना ही इस विवाद को शांत करने का सबसे अहम रास्ता माना जा रहा है।