एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे को झटका: मंत्री नरहरि झिरवाल ने रांजणगांव की मिथेनॉल कंपनी का लाइसेंस किया बहाल
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग में एक बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम ने हलचल मचा दी है। विभाग के मंत्री नरहरि झिरवाल ने पुणे के रांजणगांव स्थित एक प्रमुख मिथेनॉल निर्माता कंपनी के रद्द किए गए लाइसेंस पर रोक लगाते हुए उसे बहाल कर दिया है। यह लाइसेंस एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे की कड़ी कार्रवाई के तहत रद्द किया गया था। मंत्री झिरवाल द्वारा आयुक्त के फैसले पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद प्रशासनिक तंत्र और सरकारी फैसलों के बीच खींचतान सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है।
यह पूरा मामला पुणे क्षेत्र में हुई जहरीली शराब की घटना के बाद शुरू हुए बड़े जांच अभियान से जुड़ा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में पूरे महाराष्ट्र में मिथेनॉल की अवैध बिक्री और भंडारण पर अंकुश लगाने के लिए सघन अभियान चलाया गया था। इस राज्यव्यापी कार्रवाई के दौरान एफडीए टीमों ने कुल 936 मिथेनॉल निर्माण, भंडारण और वितरण इकाइयों की कड़ाई से जांच की थी। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि इनमें से 309 कंपनियों में नियमों का गंभीर उल्लंघन और मिथेनॉल के रखरखाव में भारी अनियमितताएं पाई गई थीं।
अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने सख्त रुख अपनाते हुए 70 कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने के कड़े आदेश दिए थे, जिनमें पुणे के रांजणगांव औद्योगिक क्षेत्र में स्थित मिथेनॉल इकाई भी शामिल थी। आयुक्त के इस कदम के खिलाफ प्रभावित कंपनियों ने नियमानुसार विभागीय मंत्री के समक्ष अपील दायर की थी। मंत्री नरहरि झिरवाल के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान रांजणगांव की इस कंपनी के पक्ष को सुनने के बाद कार्रवाई पर रोक लगा दी गई और उसका लाइसेंस बहाल कर दिया गया।
लाइसेंस बहाल होने के इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कंपनी को राहत राजनीतिक प्रभाव के कारण दी गई है। हालांकि, मंत्री नरहरि झिरवाल ने किसी भी तरह के दबाव के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि मंत्री कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही नियमानुसार यह निर्णय लिया गया है।