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सावधान! अगले 2 हफ्ते तबाही मचाएगा मानसून! भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 5 राज्यों के लिए जारी किया रेड अलर्ट

04 Aug, 2026 15

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 4 अगस्त 2026 को देशभर के लिए एक अहम चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि अगले 2 हफ्ते तक देश में मानसून असामान्य रूप से सक्रिय रहेगा। इसकी सबसे बड़ी वजह भारतीय महासागर में एल-नीनो का कमजोर पड़ना और बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र का बताया गया है। विभाग ने खास तौर पर महाराष्ट्र, गुजरात और केरल के लिए नारंगी और लाल चेतावनी जारी की है। इसका मतलब है कि इन राज्यों में अगले 14 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मुंबई, पुणे, सूरत, वडोदरा, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में जलभराव, नदियों में उफान और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है और आम लोगों से कहा है कि वो अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। ये अलर्ट किसानों, शहरी लोगों और आपदा प्रबंधन टीमों सभी के लिए बहुत जरूरी है।

राज्यवार मौसम का हाल - महाराष्ट्र, गुजरात और केरल में क्या होगा
महाराष्ट्र के लिए मौसम विभाग ने 5 से 7 अगस्त तक सबसे ज्यादा खतरा बताया है। मुंबई, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी और कोल्हापुर में 200 मिमी तक बारिश हो सकती है। मुंबई में लोकल ट्रेन लेट होने और निचले इलाकों में पानी भरने की संभावना है। पुणे और सतारा के घाट इलाकों में भूस्खलन का अलर्ट है। गुजरात में सूरत, नवसारी, वलसाड और वडोदरा के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। यहां ताप्ती और नर्मदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सरकार ने निचले इलाकों को खाली कराना शुरू कर दिया है। केरल में तटीय इलाकों में 3 मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं। कोच्चि, अलाप्पुझा और कोल्लम में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलेंगी। कर्नाटक के तटीय जिले और गोवा में भी मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। उत्तर भारत में दिल्ली, यूपी और बिहार में उमस के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी जो धान और सोयाबीन की फसल के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।
 

इस बार मानसून इतना तेज क्यों है - वैज्ञानिक कारण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार मानसून के तेज होने के पीछे 2 मुख्य कारण हैं। पहला कारण भारतीय महासागर में एल-नीनो का कमजोर होना है। जब एल-नीनो कमजोर होता है तो हिंद महासागर से ज्यादा नमी वाली हवाएं भारत की तरफ आती हैं। दूसरा कारण बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र है जो अगले 48 घंटे में और तेज होकर महाराष्ट्र और गुजरात की तरफ बढ़ेगा। इसके साथ ही अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं भी सामान्य से ज्यादा ताकतवर हैं। जलवायु वैज्ञानिक डॉ. रोहिणी श्रीवास्तव का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अब मानसून के पैटर्न बदल रहे हैं। बारिश कम दिनों में ज्यादा हो रही है। इसी वजह से शहरों में बाढ़ और पहाड़ों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। किसानों के लिए ये अच्छी खबर है क्योंकि धान और दलहन की फसल को पानी मिलेगा लेकिन शहरों के लिए ये चुनौती बन गई है।

 सरकार और NDRF की तैयारी - आम लोगों के लिए क्या गाइडलाइन
मानसून की भयावहता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें अलर्ट पर हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 20 टीमें महाराष्ट्र, गुजरात और केरल में पहले से तैनात कर दी गई हैं। महाराष्ट्र में कोयना और जयकवाड़ी डैम से पानी छोड़ा जा रहा है ताकि डैम ओवरफ्लो न हो। गुजरात में सेना और वायुसेना को स्टैंडबाय पर रखा गया है। सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1077 जारी किया है। मौसम विभाग ने आम लोगों के लिए 5 जरूरी सलाह दी हैं। पहली, भारी बारिश के समय घर से बाहर न निकलें। दूसरी, कार चलाते समय जलभराव वाले रास्तों से बचें। तीसरी, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर रहें। चौथी, किसानों से कहा गया है कि कटी हुई फसल को प्लास्टिक से ढक कर रखें। पांचवीं, मछुआरों को अगले 5 दिन तक समुद्र में न जाने का आदेश दिया गया है। स्कूलों और कॉलेजों को भी जरूरत पड़ने पर बंद करने के आदेश दिए गए हैं।
 

निष्कर्ष और आगे का अनुमान
मौसम विभाग का कहना है कि ये तेज मानसून अगले 2 हफ्ते तक जारी रह सकता है। 20 अगस्त के बाद बारिश की तीव्रता थोड़ी कम हो सकती है लेकिन पूरी तरह रुकेगी नहीं। देशभर के 150 बड़े डैम अभी 65 प्रतिशत भर चुके हैं जो रबी की फसल के लिए अच्छा संकेत है। लेकिन साथ ही शहरों में बाढ़ और ग्रामीण इलाकों में फसल खराब होने का खतरा भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब हमें क्लाइमेट चेंज के हिसाब से अपनी तैयारी बदलनी होगी। शहरों में ड्रेनेज सिस्टम बेहतर करना होगा और पहाड़ी इलाकों में पेड़ लगाने होंगे। फिलहाल सबसे जरूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लें और सुरक्षित रहें। क्योंकि मानसून वरदान भी है और अगर लापरवाही हुई तो अभिशाप भी बन सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 




 

 

 

 

 

 

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