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मुंबई हाईकोर्ट ने चिल्ड्रंस ऐड सोसायटी की जमीन पर ‘SRA’ को किया खारिज !

18 Aug, 2017 1619

ब्यूरो रिपोर्ट / in24 न्यूज़

झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना की शुरुवात राज्य सरकार ने गरीबों को बसाने के लिए किया था लेकिन जिस गति से विकास की आंधी पूरे मुंबई के झुग्गी बहुल इलाकों में आयी उसमे भ्रष्टाचार ने विकास की राह में रोड़ा डाल दिया। शुक्र इस बात का है कि भारतीय लोकतंत्र में की गयी कानून व्यवस्था के आगे किसी का जोर नहीं चलता वर्ना लोकतंत्र की नींव को खोखला कर रहे चंद भ्रष्टाचारी अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो जाते।  यह सनसनीखेज मामला है मुंबई के चेंबूर पूर्व स्थित बोरला गांव का, जहां के चिल्ड्रन्स ऐड सोसाइटी की बेशकीमती 6 एकड़ जमीन पर कई बिल्डरों और एसआरए अधिकारीयों की गिद्ध दृष्टी गड़ी हुई थी। लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने चेंबूर ईस्ट के बोरला गांव में चिल्ड्रन्स ऐड सोसायटी की जमीन पर हुए अतिक्रमण को गलत बताते हुए वहां झोंपडपट्टी पुनर्विकास प्रॉधिकरण (एसआरए) की विकास योजना को खारिज कर दिया है। सोसायटी की यह बेशकीमती जमीन 6 एकड़ की है और वहां पर अनेक बिल्डरों और एसआरए तक की नजर लगी थी।
इस सोसायटी का गठन 1921 में हुआ था और इसमें उन बच्चों को रखा जाता है जो बाल सुधार के लिए आते हैं। एक तरह से यह रिमांड होम भी कहलाता है। यहां अभी करीब 900 बच्चे हैं। सोसायटी का मुख्यालय माटुंगा में है जो डोंगरी सहित कई जगह पर बाल गृह चलाता है। यह जगह मोहम्मद यूसुफ ट्रस्ट ने कुछ शर्तों पर सोसायटी को उपहार में दी थी।  यह आदेश जज आरएम सावंत और जज श्रीमती साधना जाधव ने दिया है। इस केस को लड़ने वाले वकील मोहन टेकावडे ने बताया कि इस आदेश के अनुसार, सोसायटी का मास्टर प्लान एमएमआरडीए बनाएगा और इसका कंस्ट्रक्शन राज्य सरकार करेगी। उनका यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में पहल करके यह भूखंड सोसायटी को दिलवाया है। इसके लिए उन्होंने कई बार बैठक भी आयोजित की थी।
ट्रस्ट के संचालक मंडल के सदस्य विश्वनाथ चौधरी के अनुसार फ‌िलहाल इस भूखंड का एक ही हिस्सा सोसायटी के पास है और अब ज्यादा जमीन मिलने से नए कंस्ट्रक्शन से और 'बेसहारा' बच्चों को सहारा मिल सकेगा। सामाजिक कार्यकर्ता कमल सिंह ने एक जनहित याचिका दायर करके आरोप लगाया था कि कुछ 'भू माफिया' सोसायटी की जमीन पर अपना कब्जा बता रहे हैं। याचिका में कहा गया था कि एक प्राइवेट डेवलपर ने सोसायटी के भ्रष्ट अधिकारियों के साथ और एसआरए के कुछ अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर इस 1500 करोड़ रुपये कीमती जमीन को हड़पने की कोशिश की है। इस जमीन पर इन लोगों ने सरकार की पूर्व अनुमति के बिना गैरकानूनी ढांचे खड़े कर दिए हैं। सिंह ने कोर्ट से आग्रह किया था कि चूंकि इन भू माफियाओं की सहायता सरकार के कुछ अधिकारियों ने भी की है इसलिए उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर यह मामला सीबीआई को सौंप देना चाहिए।
इस मामले में एक एफआईआर इस साल धारा 409 और 420 के तहत दर्ज भी की गई थी जिसमें प्रमुख आरोपी सोसायटी के सीईओ नवनाथ विट्ठल शिंदे को बनाया गया था। वैसे एसआरए योजना अमल में लाने के फ़ौरन बाद ही मुंबई में कुकुरमुत्तों की भांति विकासक उग आये लेकिन उन्होंने झुग्गी बहुल इलाकों के झोपड़ों को जमींदोज कर गरीबों को वहां से बेदखल कर या तो ट्रांजिट कैंप में स्थलांतरित कर दिया या फिर उन्हें किराया देकर वहां से चलता कर दिया।
आज उन गरीबों की बदहाली देखने और सुनने वाला कोई नहीं है अलबत्ता कथित विकासकों ने एसआरए प्रोजेक्ट को बिना पूरा किये उसे दूसरे विकासक को अनौपचारिक तरीके से बेच दिया। यानि कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि अब एसआरए प्रोजेक्ट हाथ में लेने के बाद बिल्डर उसे पूरे अंजाम तक नहीं पहुंचाते बल्कि उसकी ट्रेडिंग कर अपना नफा और अपनी कमाई करने लगे हैं। जिन की जांच होना वक्त की जरुरत है।

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