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प्याज की कीमतों में तेज उछाल, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ी महंगाई की चिंता

24 Aug, 2026 17


चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार बफर स्टॉक से प्याज जारी करने और विशेष ट्रेनों के जरिए बड़े शहरों तक इसकी आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी में है। 

देशभर में प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। 24 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज का औसत खुदरा भाव 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यह कीमत पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 45 प्रतिशत अधिक और पिछले महीने की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत ज्यादा बताई गई है। दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में बढ़ती कीमतों का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ रहा है। रोजमर्रा के खाने में इस्तेमाल होने वाली इस जरूरी सब्जी की कीमत बढ़ने से परिवारों के मासिक खर्च पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। प्याज की कीमतों में अचानक आई तेजी ऐसे समय में चिंता बढ़ा रही है, जब कुछ अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की खबरें सामने आ रही हैं।


प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अलग-अलग शहरों में अलग स्तर पर दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में प्याज का भाव करीब 55 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किया गया है, जबकि मुंबई में करीब 37 रुपये, कोलकाता में 50 रुपये और चेन्नई में 58 रुपये प्रति किलो तक कीमत बताई गई है। हालांकि अलग-अलग बाजारों, गुणवत्ता और बिक्री स्थान के आधार पर खुदरा कीमतों में अंतर हो सकता है। दिल्ली और कुछ अन्य प्रमुख शहरों में कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक रहने के कारण सरकार ने इन क्षेत्रों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए विशेष रेल परिवहन की व्यवस्था कर रही है।

प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति से जुड़ी स्थिति को प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्याज के उत्पादन में कमी और बाजार में आवक से जुड़े दबाव के कारण कीमतों पर असर पड़ा है। जब मंडियों में किसी जरूरी कृषि उत्पाद की आवक मांग के मुकाबले कम हो जाती है, तो खुदरा बाजार में कीमत बढ़ने लगती है। इस समय भी प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक और खुदरा दोनों बाजारों में दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त को देशभर में प्याज की औसत थोक कीमत करीब 3,299.85 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि 21 जुलाई को यह करीब 2,745.58 रुपये प्रति क्विंटल थी। इससे पता चलता है कि कीमतों का दबाव केवल खुदरा बाजार तक सीमित नहीं है। 

बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक में रखे प्याज को बाजार में उतारने की योजना बनाई है। इसके साथ ही नासिक से उन शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाने की व्यवस्था की जा रही है, जहां कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं। इस अभियान को 'कांदा एक्सप्रेस' नाम दिया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इन विशेष ट्रेनों के जरिए नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी तक प्याज भेजा जाएगा। सरकार की कोशिश है कि बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम किया जाए। बफर स्टॉक का इस्तेमाल आम तौर पर ऐसे समय किया जाता है, जब किसी जरूरी कृषि वस्तु की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो और अतिरिक्त आपूर्ति के जरिए बाजार को स्थिर करने की जरूरत महसूस हो। 

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्याज की कीमतों में तेजी कब तक बनी रहेगी और सरकारी कदमों का बाजार पर कितना असर होगा। सरकार द्वारा बफर स्टॉक जारी करने और विशेष ट्रेनों से आपूर्ति बढ़ाने के बाद बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। अगर अतिरिक्त आपूर्ति प्रभावी तरीके से बाजार तक पहुंचती है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि खुदरा बाजार में राहत कितनी जल्दी मिलेगी, यह स्थानीय आपूर्ति, मांग और मंडियों में आने वाले माल पर निर्भर करेगा। फिलहाल प्याज की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट और खाद्य महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में सरकारी आपूर्ति व्यवस्था और मंडियों में प्याज की आवक पर नजर रहेगी।

 

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