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भारत-अमेरिका संबंधों के बीच सर्जियो गोर के दावे पर सरकार का जवाब, जानिए क्या है पूरा मामला

24 Aug, 2026 19

अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद विवाद बढ़ गया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान भारत की ओर से पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने की बात कही गई थी। अब भारतीय पक्ष की ओर से इस दावे पर सफाई सामने आई है। 

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ्रांस में हुई जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात का जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, गोर ने दावा किया कि उस मुलाकात को लेकर भारतीय पक्ष की ओर से पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने की बात कही गई थी। उनके मुताबिक, ट्रंप ने उनसे पूछा था कि क्या भारतीय पक्ष की कोई विशेष मांग है। गोर ने दावा किया कि उन्हें बताया गया था कि विदेश मंत्रालय चाहता है कि मीडिया को बुलाया जाए, लेकिन पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस न हो। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय पक्ष सवाल-जवाब को लेकर सहज नहीं था। इन टिप्पणियों के सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। 

सर्जियो गोर के बयान पर भारत सरकार के सूत्रों की ओर से अलग तस्वीर पेश की गई है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि किसी भी उच्चस्तरीय या वीवीआईपी दौरे से पहले दोनों पक्षों के बीच नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर बातचीत होना सामान्य राजनयिक प्रक्रिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में भारतीय पक्ष ने वीवीआईपी दौरों के लिए अपनी सामान्य और मानक प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा की थी। इसका मतलब यह है कि कार्यक्रम के स्वरूप और सार्वजनिक उपस्थिति से जुड़े पहलुओं पर पहले से चर्चा होना असामान्य बात नहीं है। सरकार की ओर से इसी प्रक्रिया को सर्जियो गोर के दावे के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है।

इस पूरे विवाद का केंद्र प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के दौरान मीडिया की मौजूदगी और सवाल-जवाब का मुद्दा है। सर्जियो गोर के अनुसार, भारतीय पक्ष की ओर से पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने की इच्छा जताई गई थी। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप को इस प्राथमिकता के बारे में जानकारी दी गई थी और उन्होंने इस पर आपत्ति नहीं जताई। दूसरी ओर, भारतीय सरकारी सूत्रों ने इस मामले को वीवीआईपी कार्यक्रमों की सामान्य तैयारियों और प्रोटोकॉल से जोड़कर देखा है। यानी एक तरफ राजदूत की ओर से बैठक के प्रारूप को लेकर विशेष दावा सामने आया, जबकि भारतीय पक्ष का कहना है कि उच्चस्तरीय दौरों में कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर ऐसी बातचीत सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

भारत और अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और नेताओं की मुलाकातों में प्रोटोकॉल, मीडिया व्यवस्था और सार्वजनिक कार्यक्रमों की योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में किसी राजदूत की ओर से बैठक के प्रारूप को लेकर सार्वजनिक बयान दिए जाने के बाद उस पर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर कोई बड़ा राजनयिक विवाद पैदा हो गया है। भारतीय पक्ष ने फिलहाल इस मामले में कार्यक्रमों की व्यवस्था से जुड़ी अपनी सामान्य प्रक्रिया पर जोर दिया है। इसलिए पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए दोनों पक्षों के बयानों और आधिकारिक जानकारी को अलग-अलग देखना जरूरी है।
अब आगे क्या?

फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्जियो गोर के दावे और भारतीय सरकारी सूत्रों की प्रतिक्रिया के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। गोर ने जहां प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात में मीडिया और सवाल-जवाब के प्रारूप को लेकर एक विशेष दावा किया, वहीं भारत सरकार के सूत्रों ने इसे वीवीआईपी कार्यक्रमों से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया बताया है। ऐसे में मामले की वास्तविक तस्वीर दोनों पक्षों की आधिकारिक स्थिति और आगे सामने आने वाली जानकारी से ही पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल भारत की ओर से यही संकेत दिया गया है कि उच्चस्तरीय नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था पर पहले से चर्चा होना सामान्य राजनयिक प्रक्रिया है। 

 

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