जम्मू-कश्मीर में 12 सालों से सेना के जवान मनाते हैं गणेशोत्सव
संवाददाता/in24 न्यूज़.
गणपति बप्पा की पूजा यूं तो आम आदमी करता ही है, मगर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत-पाकिस्तान की सीमा पर फौजियों के बीच भी गणेश उत्सव पिछले 12 सालों से मनाया जा रहा है। 13वें साल भी इसे मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। जम्मू-कश्मीर के पुंछ में पुलस्त नदी के पास भारत-पाकिस्तान सीमा पर पिछले 12 सालों से भगवान गणेश की मूर्ती की स्थापना होती है। इसकी तैयारी स्थानीय सामाजिक संगठन और भारतीय फौज की यूनिट 101 गनर रेजिमेंट द्वारा की जाती है। दस दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव में भारतीय फौज के जवान दिन रात गणेश पंडाल पर पहरा देते हैं। 13वें साल भी इसके लिए तैयारियां पूरी की जा रही हैं। पुंछ की सामाजिक कार्यकर्ता ईशरदीदी के मुताबिक इस साल भी हम सीमा पर गणेश उत्सव मनाने जा रहे हैं। हालांकि पिछले दो सालों से कोरोना के चलते बड़े पैमाने पर इसे नहीं मनाया गया।भारत-पाकिस्तान सीमा पर होने वाले इस गणेश उत्सव के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा मुंबई से लाई जाती है। हफ्तों पहले इसे बनाने का आर्डर दिया जाता है। पुंछ में इस गणपति पंडाल को किंग ऑफ एलओसी नाम दिया गया है। ईशरदीदी ने बताया कि पिछले 12 सालों से गणेश मूर्ति मुंबई में एक ही कारीगर से बनवाई जाती है। इस साल रविवार 21 अगस्त को गणेश मूर्ति मुंबई से जम्मू कश्मीर के पुंछ में ले जाई जा रही है। उन्होंने बताया कि सीमा पर हमारे जवान कठिन परिस्थितियों में भी देश की रक्षा करते हैं। सभी को विश्वास है कि इस साल भी सीमा पर गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। गणेश उत्सव के दस दिनों तक भारतीय सेना के गनर रेजिमेंट के जवान भगवान गणेश की पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश भारतीय जवानों को सीमा पर दुश्मनों से महफूज रखते हैं। यही वजह है कि बटालियन का हर जवान इस दौरान भगवान गणेश की पूजा कर आशीर्वाद लेता है। सुबह 4-5 बजे जवानों द्वारा बप्पा की आरती की जाती है। इसके अलावा शाम सात बजे भी जवानों की उपस्थिति में स्थानीय लोग मिलकर आरती करते हैं। अनंत चतुर्थी के दिन शेर-ए-कश्मीर पुल के पास पुलस्त नदी में गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। बता दें कि देश भर में 31 अगस्त से गणेश उत्सव की शुरूआत होने वाली है।