यूपी के निजी स्कूल अब आरटीआई के दायरे में
संवाददाता/in24 न्यूज़.
अब उत्तर प्रदेश में निजी स्कूलों पर आरटीआई का शिकंजा कसेगा। बता दें कि प्राइवेट स्कूलों पर अधिक फीस वसूलने का आरोप लगाकर धक्केशाही का शिकार होने वाले अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। जो स्कूल खुद को घाटे में चलता हुआ दिखाई देते हैं अब उनका सच सबके सामने आने वाला है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में बड़ा फैसला लेते हुए प्राइवेट स्कूलों को अब सूचना के अधिकार के दायरे में लाने का आदेश जारी किया गया है। इस बाबत राज्य सूचना आयुक्त प्रमोद कुमार तिवारी ने अपने आदेश में निजी स्कूलों को कहा है कि वे अपने यहां जन सूचना अधिकारियों की नियुक्ति करें। राज्य के इन निजी स्कूलों के सूचना के अधिकार के दायरे में आने का ये अर्थ होगा कि कोई भी व्यक्ति स्कूल की फीस, संचालन में खर्च, विद्यालय में खर्च संबंधी जानकारी स्कूलों से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त कर सकेगा। स्कूलों को ये जानकारियां अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होंगी। दरअसल ऐसे निजी विद्यालयों में जन सूचना अधिकारी की भी व्यवस्था की जाएगी। अब तक निजी विद्यालय राज्य की ओर से वित्त पोषित न होने को आधार बनाकर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना नहीं देते थे। पर अब आयोग ने कहा है कि अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम पारित होने के बाद सभी विद्यालय इसी अधिनियम में आते हैं। उधर, उत्तराखंड में अगर आप निजी स्कूल से कोई सार्वजनिक सूचना लेना चाहते हैं तो अब आप आसानी से सूचना प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश के सभी निजी स्कूल अब सूचना का अधिकार (आरटीआई) के दायरे में आएंगे। ऐसे में निजी स्कूलों को आरटीआई के तहत मांगी जाने वाली सभी सूचनाएं देनी होंगी। संजय शर्मा नाम के शख्स ने लखनऊ के दो नामी स्कूलों को लेकर अपील दायर की थी। इसके बाद राज्य सूचना आयोग ने इन दोनों निजी स्कूलों को निर्देश दिया कि वे सूचना अधिकारियों की नियुक्ति करें ताकि सूचना अधिकार कानून 2005 के तहत लोगों को जानकारी मिल सके। संजय शर्मा द्वारा लखनऊ के दो प्रतष्ठित निजी विद्यालयों के विषय में जन सूचना अधिकारी/मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन से आरटाअई एक्ट के तहत राज्य सूचना आयोग में सेकेंड अपील की थी। इसमें कहा गया कि अगर निजी विद्यालयों को बनाने के लिए विकास प्राधिकरणों द्वारा रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई गई है तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा डीएवी कालेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी एवं अन्य बनाम डायरेक्टर आफ पब्लिक इंन्सट्रक्शन एवं अदर्स में प्रतिपादित नियम के अनुसार ऐसे विद्यालय राज्य की ओर से पर्याप्त रूप से वित्त पोषित समझे जायेंगे। बहरहाल, इस फैसले से जहां अभिभावकों को राहत मिलेगी, वहीं निजी स्कूलों को पारदर्शी बनना पड़ेगा।