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रामसेतु की सिस्मिक और जियोकेमिस्ट्री सर्वे की तैयारी शुरू

08 Oct, 2021 809

संवाददाता/in24 न्यूज़।  
तमिलनाडु में स्थित रामसेतु की सिस्मिक और जियोकेमिस्ट्री सर्वे की तैयारी की जा रही है। इसकी वैज्ञानिकता को लेकर गोवा स्थित राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (एनआइओ) लंबे समय से अध्ययन में जुटा है। इस बारे में बीएचयू के पूर्व छात्र और राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान के निदेशक प्रो. सुनील कुमार सिंह ने बताया कि इस ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहर के अध्ययन संग परीक्षणों से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम जारी है। रामसेतु की लंबाई 48 किमी और चौड़ाई तीन किमी है। संस्थान के विज्ञानी सेतु तक पहुंच कर अध्ययन के क्रम में कई तरह के नमूने एकत्र कर चुके हैं। अब सिस्मिकऔर जियोकेमिस्ट्री सर्वे होगा। फिर इस सेतु की आयु का वैज्ञानिक तरीके से पता लगाएंगे। तमिलनाडु में स्थित रामसेतु रामेश्वरम को श्रीलंका के जाफना द्वीप से जोड़ता था। यह मन्नार की खाड़ी में स्थित है। अमेरिकी संस्था नासा ने उपग्रह से सेतु का वर्ष 2007 में चित्र खींचा था। अध्ययन के बाद दावा किया था कि ये मानवनिर्मित विश्व की सबसे प्राचीन सेतु संरचना है। वाल्मीकि रामायण से स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण, रामकियेन और रामचरित मानस में सेतु के निर्माण और इससे होकर लंका जाने के विवरण हैं। इन ग्रंथों के अनुसार राम और उनके खोजी दल ने रामेश्वरम से मन्नार तक वह मार्ग खोजा जो अपेक्षाकृत सुगम व रामेश्वरम के निकट था। प्रमुख 65 रामायण के अनुसार यहीं से राम और वानर सेना ने लंका कूच किया था। इस बारे मैं एनआइओ के निदेशक प्रो. सिंह बताते हैं कि समुद्र के भीतर तमाम तरह के खनिज रूप में अथाह खजाना है जो 75,000 वर्ग किमी में है। इसमें पालीमेटैलिक नेड्यूल्स हैं। मध्य हिंद महासागर में तीन किमी में आयरन, कापर, कोबाल्ट, निकिल, सल्फेट के अलावा लगभग 75,000 वर्ग किमी के दायरे में रेयर अर्थ एलीमेंट और प्लेटिनम ग्रुप के भंडार हैं। इनकी मात्रा लगभग 100 मिलियन टन आंकी गई है। इनके उत्खनन और उपयोग के लिए प्रधानमंत्री ने डीप ओशन मिशन की शुरुआत की है। बता दें कि रामसेतु से हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है।

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