लद्दाख में तीन सौ चीनी सैनिक तैनात, सौ से ज्यादा तंबू गाड़े
संवाददाता/in24 न्यूज़.
चीन की नीयत से दुनिया परिचित है. यह दोस्त बनकर भी पीठ में छुरा भोंकने से बाज नहीं आता. अब लद्दाख में चीनी सैनिकों ने हरकत शुरू की है. बात दें कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है. इसी बीच खबर आई है कि चीन ने लद्दाख में एलएसी पर पैंगोंग त्सो झील और गालवान घाटी में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है. चीन की ओर से सैनिकों की तैनाती से ये संकेत मिला है कि वह निकट भविष्य में भारतीय सेना के साथ टकराहट की स्थिति से पीछे नहीं हटेगा. शनिवार को सूत्रों ने इस बारे में जानकारी दी है. सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना के साथ इस क्षेत्र में जारी तनातनी के बीच चीनी सेना ने गैलवान घाटी में अपनी उपस्थिति में पहले से अधिक इजाफा कर दिया है. इस इलाके में चीन ने पिछले दो हफ्ते में 100 नए टेंट लगा लिए हैं साथ और बंकरों के निर्माण के भारी उपकरण भेजे हैं. वहीं भारतीय सेना ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी प्रकार की चीनी घुसपैठ की अनुमति नहीं देंगे और उन क्षेत्रों में गश्त को और भी मजबूत करेंगे. बता दें कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन और भारत के बीच बढ़ते तनाव ने दोनों देशों को हजारों की संख्या में सैनिकों की तैनाती करने को मजबूर कर दिया है. चीनी और भारतीय दोनों सेनाएं उन स्थानों पर हाई अलर्ट पर हैं, जहां पिछले दिनों तनाव और झड़पें हुई थीं. बता दें कि इस इलाके में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) आए दिन भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर भारतीय सेना के साथ संघर्ष कर रही है. अब मामला बढ़ गया है, क्योंकि इसे स्थानीय स्तर पर सेनाओं द्वारा हल नहीं किया जा सकता है और राजनयिक रूप से बातचीत शुरू हो गई है. बता दें कि भारतीय उपग्रह की निगरानी और खुफिया जानकारी से पता चला है कि चीन ने गलवां नदी के पास भारतीय गश्ती क्षेत्र के पास सैनिकों के लाने-ले जाने और सामानों की आपूर्ति के लिए क्षेत्र में कई सड़कों का निर्माण कर लिया है. इसके अलावा दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में 81 ब्रिगेड के अधिकारियों और उनके चीनी समकक्षों के बीच बैठकें हो रही हैं. दोनों पक्षों के स्थानीय सैन्य कमांडरों के बीच अब तक पांच बैठक हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है. सूत्रों ने कहा कि चीनी सैनिकों ने एलएसी पर तीन स्थानों को पार किया है. इनमें से प्रत्येक स्थान पर लगभग 800-1000 चीनी सैनिक मौजूद हैं. बता दें कि चीन और भारतीय सैनिकों के बीच बढ़ती तनातनी के बीच सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने शुक्रवार को लद्दाख में 14 कोर के मुख्यालय लेह का दौरा किया था और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जवानों की सुरक्षा तैनाती की समीक्षा की. उन्होंने उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाई. के. जोशी, 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ एलएसी की जमीनी स्थिति के बारे में जानकारी हासिल की थी.