सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं किसान
17 Dec, 2020
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संवाददाता/in24 न्यूज़।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नए कृषि क़ानूनों को कुछ समय के लिए रोकने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे किसानों से बातचीत संभव हो सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि इस मामले का समाधान होने तक सरकार क्या किसानों को कानून लागू न करने का आश्वासन दे सकती है। अटॉर्नी जनरल ने इस पर कहा कि वह तुरंत इस पर कुछ नहीं कह सकते हैं। कृषि सुधार क़ानूनों के खिलाफ 20 दिन से दिल्ली सीमा पर किसान आंदोलन का हल फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से भी निकलता नहीं दिख रहा है। किसान आंदोलन को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला। देश की सर्वोच्च अदालत ने दूसरे दिन सुनवाई करते हुए कहा कि मामले के निपटारे के लिए समिति का गठन किया जा सकता है। इसमें दोनों पक्ष अपनी अपनी बात रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही कहा कि किसानों को प्रदर्शन से रोका नहीं जा सकता है, लेकिन साथ ही किया कि अगर किसान आंदोलन हिंसक रूप ले लेता है तो इसका जिम्मेदार किसे माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नए कृषि क़ानूनों को कुछ समय के लिए रोकने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे किसानों से बातचीत संभव हो सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि इस मामले का समाधान होने तक सरकार क्या किसानों को कानून लागू न करने का आश्वासन दे सकती है। अटॉर्नी जनरल ने इस पर कहा कि वह तुरंत इस पर कुछ नहीं कह सकते हैं। कृषि सुधार क़ानूनों के खिलाफ 20 दिन से दिल्ली सीमा पर किसान आंदोलन का हल फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से भी निकलता नहीं दिख रहा है। किसान आंदोलन को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला। देश की सर्वोच्च अदालत ने दूसरे दिन सुनवाई करते हुए कहा कि मामले के निपटारे के लिए समिति का गठन किया जा सकता है। इसमें दोनों पक्ष अपनी अपनी बात रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही कहा कि किसानों को प्रदर्शन से रोका नहीं जा सकता है, लेकिन साथ ही किया कि अगर किसान आंदोलन हिंसक रूप ले लेता है तो इसका जिम्मेदार किसे माना जाएगा।