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Russia-Ukraine War : जानें कैसे पड़ेगा भारत पर असर

24 Feb, 2022 532
संवाददाता/ in24 न्यूज़
रूस और यूक्रेन के बीच वॉर शुरू हो गया है. अमेरिका और यूरोप सहित कई देश रूस की सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं तो वहीं चीन सहित कई ऐसे देश हैं जो रूस के साथ खुलेआम हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध से भारत पर क्या असर पड़ेगा। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि इस युद्ध से भारत कैसे प्रभावित होगा?
बढ़ सकती है कच्चे तेल की कीमत
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। रूस से होने वाली तेल या गैस की सप्लाई का प्रभावित होना सीधे तौर पर भारत के लिए अधिक चिंता का विषय नहीं है। बावजूद इसके कच्चे तेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतें उसकी मुश्किल जरूर बढ़ा सकती हैं। इसकी वजह है कि भारत अपनी जरूरत के लिए तेल के आयात पर अधिक निर्भर है। दोनों देशों के युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude) की कीमत 2014 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
न्यूक्लियर एनर्जी पर काम होगा प्रभावित
युद्ध की स्थिति में यूक्रेन के साथ भारत का व्यापार संकट में पड़ जाएगा। यूक्रेन और भारत के बीच हुए व्यापार के आंकड़ें पर नजर डालें तो, भारत यूक्रेन से खाद्य तेल, खाद, न्यूक्लियर रिएक्टर और बॉयलर खरीदता है. युद्ध के बाद इसकी आपूर्ति में बाधा आ सकती है, जिसका सीधा असर भारत का न्यूक्लियर एनर्जी कार्यक्रम पर पड़ सकता है। भारत में यूक्रेन एंबेसी की वेबसाइट पर दिए आंकड़ों के अनुसार, 2020 में दोनों देशों के बीच 2.69 बिलियन डॉलर का व्यापार था। इसमें यूक्रेन ने भारत को 1.97 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट (Export) किया था। वहीं, भारत ने यूक्रेन को 721.54 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया था।
भारतीय शेयर मार्केट पर असर
रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य जंग का असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखने लगा है। गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 1814 अंक गिरावट के साथ खुला। वहीं एनएसई का निफ्टी (Nifty) में भी 367.35 अंक यानी 2.15% की कमी हुई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में यह 55,375 अंक तक नीचे गया। सुबह 9.30 बजे इसमें 1399.62 अंक यानी 2.45% की गिरावट हुई।

एलएसी पर भी बढ़ सकती है चीन की आक्रामकता?
रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य कार्रवाई का असर चीन के साथ एलएसी पर भी देखने को मिल सकता है। अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और यूक्रेन की लड़ाई में अमेरिका व्यस्त है, तो ऐसे में चीन भारत के साथ उलझ सकता है तो ऐसे में इसकी पूरी संभावना है कि वह एलएसी पर कुछ आक्रामक हरकत भी करे। इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (IDSA) में असोसिएट फैलो स्वस्ति राव का कहना है कि जब भी ऐसी अंतरराष्ट्रीय घटना होती है इसमें अमेरिका कमजोर साबित होता है चीन को मजबूती मिलती है। भारत के लिए यह मुश्किल स्थिति है।

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