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नाना पाटेकर का आखिरी सार्वजनिक भाषण, हर शब्द सुनकर नम हुईं आंखें

08 Oct, 2026 20

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक निधन के बाद, उनके अंतिम सार्वजनिक भाषण की चर्चा हो रही है। उनके निधन से ठीक चार दिन पहले, 4 अक्टूबर को, नाना पाटेकर ने गोवा के डोना पाउला में आयोजित सम्राट क्लब इंटरनेशनल के शिलान्यास समारोह में भाग लिया था। इस समय, जीवन, मनुष्य के उद्देश्य और अनित्यता पर उनका भाषण उनके प्रशंसकों के लिए भावुक कर देने वाला साबित हो रहा है।

नाना पाटेकर ने अपने भाषण में जीवन की अनिश्चितता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, हम सभी को एक दिन जाना ही है। मुझे नहीं पता कि मैं कल जीवित रहूंगा या नहीं। उन्होंने आगे कहा कि यह क्षण हर किसी के जीवन में एक दिन आएगा, लेकिन उससे पहले हमें यह सोचना चाहिए कि क्या हमारे पास वह करने की क्षमता और तत्परता है जो हम करना चाहते हैं।

नाना पाटेकर ने समाज के लिए कुछ करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जो केवल परिवार और व्यक्तिगत जीवन तक सीमित न रहे। उन्होंने कहा, यदि मेरा संसार मेरे बच्चों, पत्नी और घर तक ही सीमित है, तो मेरे जीवन का क्या उद्देश्य है? मुझे इस दुनिया को कुछ वापस देना चाहिए। इस कार्यक्रम के दौरान नाना पाटेकर ने अपने दिवंगत मित्र और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को भी याद किया। पर्रिकर के कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने जीवन के उद्देश्य और समाज में योगदान के महत्व के बारे में बात की।

नाना पाटेकर ने अपने भाषण में सार्वजनिक जीवन और नागरिक शिष्टाचार में अंतर पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई बात पसंद नहीं आती तो उसे बोलने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी राय व्यक्त करते समय कम से कम शालीनता और उचित व्यवहार का पालन किया जाना चाहिए। नाना पाटेकर ने कहा, अगर मुझे कोई बात पसंद नहीं आती तो मुझे उसके बारे में बोलने का पूरा अधिकार है। लेकिन बोलने का एक तरीका होता है। सार्वजनिक रूप से बोलते समय कम से कम शालीनता तो होनी चाहिए।

नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म गमन से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। अगले पांच दशकों में उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में विभिन्न भूमिकाएँ निभाकर नाम कमाया। परिंदा, प्रहार, क्रांति वीर और अब तक छप्पन जैसी फिल्मों में उनकी गंभीर और प्रभावशाली भूमिकाएं विशेष रूप से लोकप्रिय रहीं। वहीं, उन्होंने 'वेलकम' जैसी फिल्मों में हास्य भूमिकाएँ भी उतनी ही प्रभावी ढंग से निभाईं। इस प्रकार, उनके करियर में गंभीर अभिनय से लेकर हास्य भूमिकाओं तक की व्यापक विविधता देखने को मिली।

इसी बीच, 75 वर्षीय नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर की सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित मणिपाल अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उपचार कारगर नहीं हुआ।

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