तालिबान का समर्थन कर फंसे फारुख अब्दुल्ला
संवाददाता/in24 न्यूज़.
तालिबान के समर्थन में फारुख अब्दुल्ला के आने के बाद सियासी हलकों में गर्मी आ गई है। बता दें कि तालिबान ने मंगलवार शाम अफगानिस्तान में अपनी सरकार की घोषणा कर दी। इसी के साथ तालिबान सरकार में बनाए गए मंत्रियों को लेकर चर्चा शुरु हो गई जिसमें कई ऐसे मंत्री शामिल हैं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी घोषित कर रखा है और उनपर करोड़ रुपये का इनाम भी है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने ऐसा विवादिय बयान दिया है जिसकी चर्चा चारों ओर होने लगी है। दरअसल, अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार के गठन पर फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि तालिबान इस्लामिक उसूलों के आधार पर अच्छी तरह से सरकार चलाएगा. सबसे बड़ी बात ये है कि धर्मनिरपेक्ष देशों के नेता फारुख अब्दुल्ला इस्लामिक उसूलों के सरकार की तरफदारी कर रहे हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य डॉ फारुख अब्दुल्ला ने कहा की अफगानिस्तान एक अलग मुल्क है। उन्हें अब मुल्क को संभालना है। मैं यही उम्मीद करूंगा कि वे हरएक के साथ इंसाफ करेंगे और एक अच्छी हुकूमत चलाएंगे। इस्लामिक उसूलों पर एक अच्छी सरकार चलाएंगे। उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि हर मुल्क के साथ अच्छे संबंध बनाएं। बता दें कि तालिबान ने मंगलवार को घोषणा की कि मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद अफगानिस्तान की नई सरकार का नेता होगा. यानी मुल्ला मोहम्मद हसन अखुद अब अफगानिस्तान का प्रधानमंत्री होगा. यह फैसला राजधानी काबुल समेत अफगानिस्तान के अधिकांश हिस्सों पर चरमपंथी इस्लामी समूह के कब्जे के दो सप्ताह बाद आया है। गौरतलब है कि अखुंद इस समय तालिबान के निर्णय लेने वाले शक्तिशाली निकाय रहबरी शूरा या नेतृत्व परिषद का प्रमुख है। वह तालिबान के जन्मस्थान कंधार से ताल्लुक रखता है और सशस्त्र आंदोलन के संस्थापकों में से एक है। वहीं अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत कायम होने के बाद तालिबान के धार्मिक नेता मुल्ला हिबतुल्ला अखुंदजादा ने नए मंत्रिमंडल की घोषणा के कुछ घंटे बाद एक बयान में कहा कि नया मंत्रिमंडल तुरंत अपना काम शुरू कर देगा। अखुंदजादा ने कहा कि इस्लामिक अमीरात के अधिकारियों द्वारा देश के मामलों को नियंत्रित करने और चलाने के लिए एक कार्यवाहक और प्रतिबद्ध कैबिनेट की घोषणा की गई है, जो जल्द से जल्द काम करना शुरू कर देगा। मैं सभी देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार इस्लामी नियमों को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करेगी और देश में शरिया कानून, देश के सर्वोच्च हितों की रक्षा करना, अफगानिस्तान की सीमाओं को सुरक्षित करना और स्थायी शांति, समृद्धि और विकास सुनिश्चित करना मुकम्मल करेंगे। बहरहाल फारुख अब्दुल्ला का विवाद अभी और बढ़ सकता है।