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भारत से सीधे नहीं लड़ पाएगा पाकिस्तान : राजनाथ सिंह

30 Aug, 2021 734

संवाददाता/in24 न्यूज़
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान से पैदा हुए खतरे को लेकर कहा कि वह जानता है कि भारत के खिलाफ सीधे युद्ध नहीं लड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि 1965 और 1971 में मिली पराजय ने पूरी तरह यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान भारत के साथ युद्ध करने की स्थिति में नही है। भारत के साथ सीधे युद्ध न करने की अक्षमता ने पाकिस्तान को दो नीतियों पर काम करने के लिए मजबूर किया। एक तो उन्होंने एटमी रास्ता खोजने की दिशा में कदम बढ़ाए और दूसरी तरफ भारत को डेथ ऑफ थाउजेंट कट्स देने की नीति पर काम शुरू किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि कश्मीर से आतंकवाद का सफाया जल्द हो जाएगा क्योंकि धारा 370 और 35ए के चलते वहां अलगाववादी ताकतों को जो मजबूती मिलती थी वह अब खत्म हो गई है। रक्षा मंत्री ने आतंकवाद को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह परोक्ष युद्ध की नीति पर चलते हुए भारत में अस्थिरता पैदा करने में लगा है। श्री सिंह ने सोमवार को दिवंगत बलरामजी दास टंडन व्याख्यानमाला में राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर अपने संबोधन में कहा कि मेरा मानना है कि कश्मीर में बचा खुचा आतंकवाद भी समाप्त होकर रहेगा। यह विश्वास मुझे इसलिए है क्योंकि धारा 370 और 35ए के चलते वहां अलगाववादी ताकतों को जो मजबूती मिलती थी, वह अब खत्म हो गई है। रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें बड़ा बदलाव आया है और उनमें यह भरोसा पैदा हुआ है कि राष्ट्र रक्षा के कर्तव्य पालन में उन्हें खुली छूट रहेगी। सिंह ने कहा कि आज भारत आतंकवाद के खिलाफ देश की सीमाओं के भीतर तो कार्रवाई कर ही रहा है, साथ ही जरूरत पड़ने पर सीमा पार जाकर भी आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का काम हमारी सेना के बहादुर जवानों ने किया है। चाहे उरी की घटना के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक हो या पुलवामा की घटना के बाद की गई बालाकोट एयर स्ट्राइक हो, भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई की है जिसकी मिसाल कम से कम आजाद भारत के इतिहास में नहीं मिलती है। आतंकवाद को समर्थन देने के पाकिस्तान के नापाक इरादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब से भारत आजाद हुआ है, कई भारत विरोधी ताकतों की यह लगातार कोशिश रही है कि या तो सीमाओं पर या फिर सीमाओं के रास्ते से भारत के भीतर अस्थिरता का माहौल बनाया जाए। पाकिस्तान की जमीन से इसके लिए बड़े पैमाने पर लगातार कोशिश की गई है।

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