असम में हिमंत सरकार ने पेश किया यूसीसी बिल, विधानसभा में विपक्ष ने किया जबरदस्त हंगामा
हिमंता बिसवा के नेतृत्व वाली असम सरकार ने विधानसभा में बहुप्रतीक्षित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर दिया है। मुख्यमंत्री के दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट बैठक के बाद यह विधेयक पेश किया गया। सरकार ने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य नागरिक मामलों जैसे विवाह की न्यूनतम आयु, बहुविवाह पर प्रतिबंध, उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकार तथा विवाह के अनिवार्य पंजीकरण के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित कुछ प्रावधान भी प्रस्तावित किए गए हैं।
राज्य विधानसभा का विशेष सत्र 21 से 26 मई तक आयोजित होने वाला है। इस दौरान नवनिर्वाचित विधायक शपथ ग्रहण करेंगे। मंत्रिमंडल ने हाल ही में अपनी पहली बैठक में विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी। अन्य रिपोर्टों के अनुसार, विधेयक को मौजूदा सत्र के अंतिम दिन पेश किए जाने की उम्मीद थी।
हिमंता ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक धार्मिक प्रथाओं पर लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रार्थना, पूजा, धार्मिक अनुष्ठानों या अन्य धार्मिक परंपराओं और प्रथाओं को विनियमित करने का कोई इरादा नहीं है। इन सभी चीजों को विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है।
सरकार ने यह भी कहा कि यह विधेयक असम की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ये नियम राज्य के मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों पर लागू नहीं होंगे। अब असम, गुजरात और उत्तराखंड के बाद भाजपा शासित तीसरा राज्य बन जाएगा जहां यूसीसी विधेयक पेश किया जाएगा।
इस विधेयक को लेकर कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी विधायकों ने असम विधानसभा में यूसीसी बिल पेश किए जाने का विरोध किया और इसे पेश करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की मांग की।