केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस, जस्टिस स्वर्णकांता की अवमानना पर मांगा जवाब
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल समेत छह नेताओं को अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह वही मामला है जिसमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज, विनय मिश्रा और दुर्गेश पाठक ने अदालत में पेश होने से साफ इनकार कर दिया था। इन सभी नेताओं को इस अवमानना मामले में मंगलवार, 18 मई को नोटिस जारी किए गए।
अदालत ने सभी नेताओं को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी के इन नेताओं की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने रजिस्ट्री को सभी सोशल मीडिया रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और उन्हें अदालती रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले में एक एमिकस क्यूरी (अदालत के मित्र) की नियुक्ति का भी आदेश दिया है।
14 मई को अदालत ने केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। अदालत ने गौर किया था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आबकारी नीति मामले से संबंधित न्यायिक कार्यवाही के संबंध में न्यायपालिका की छवि धूमिल करने के लिए एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है। न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने अपने विस्तृत आदेश में कहा था कि जब उन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया, तो उनके खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक बयान जारी किए गए, जो निष्पक्ष आलोचना और आपराधिक अवमानना के बीच की सीमा को पार कर गए।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि संबंधित पक्ष सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर सकते थे। लेकिन इसके बजाय, उन्होंने सार्वजनिक रूप से पत्र और वीडियो प्रसारित किए, जिनमें अदालत पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया गया था और यह संदेश देने की कोशिश की गई थी कि इस अदालत द्वारा न्याय नहीं दिया जा सकता। दिल्ली उच्च न्यायालय के अनुसार, यह न्यायपालिका में जनता के बीच अविश्वास पैदा करने का प्रयास था और यदि इसे रोका नहीं गया तो अराजकता फैल सकती है। अवमानना की कार्यवाही शुरू होने के बाद न्यायमूर्ति शर्मा ने आबकारी नीति मामले की आगे की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।