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शरद पवार ने हिंदी को लेकर दिया बड़ा बयान, महाराष्ट्र में गरमाई भाषाई राजनीती !

20 Jun, 2025 386

महाराष्ट्र में  निकाय चुनाव होने वाले ऐसे में राज्य की राजनीती में काफी उतार चढ़ाव दिख  रहे है , आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीती में सियासी समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है , इस बिच महाराष्ट्र में सियासी राजनीती के साथ , भाषाई राजनीती भी चरम पर है पहली से 5वीं तक के स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा बनाए जाने को लगातार घमासान देखने को मिल रहा है उद्धव ठाकरे ,मनसे प्रमुख राज ठाकरे खुलकर इसका विरोध कर रहे है उद्धव ठाकरे ने इसका विरोध करते हुए कहा कि हिंदी थोपी क्यों जा रही है? देवेंद्र फडणवीस, अगर हिम्मत है तो हिंदी थोपकर दिखाइए. मुझे नहीं पता गुजरात में थोप रहे हैं या नहीं?, ''मुंबई में हिंदू बनाम हिंदू की मारकाट करवाने की तैयारी है. हिंदी थोपने नहीं देंगे, देवेंद्र फडणवीस जो करना है कर लीजिए. अगर थोपनी है तो गुजरात में जाकर थोपिए. वही '' एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे और कई अन्य मराठी संगठनों ने भी हिंदी को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध किया.अब इसी कड़ी में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी हिंदी को लेकर बड़ा बयान दिया हैउन्होंने कहा, “इसे वैकल्पिक ही रहना चाहिए. जो लोग हिंदी चुनना चाहते हैं, वे इसे चुन सकते हैं. सिर्फ इसलिए कि 50 से 60 प्रतिशत आबादी हिंदी बोलती है, इस भाषा को सभी के लिए अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता.”  

 बता दें कि मंगलवार  को जारी संशोधित सरकारी आदेश में कहा गया था कि हिंदी अनिवार्य होने के बजाय सामान्य रूप से तीसरी भाषा होगी, लेकिन इसमें यह विकल्प भी दिया गया है कि यदि किसी स्कूल में प्रति कक्षा 20 विद्यार्थी हिंदी के अलावा कोई अन्य भारतीय भाषा पढ़ने की इच्छा व्यक्त करते हैं तो वे इसे छोड़ सकते हैं महाराष्ट्र में हिंदी को तीसरी भाषा बनाए जाने का फैसला केवल एक शैक्षणिक नीति नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दा बन गया है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बच्चों के विकास का साधन मानती है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय दल इसे मराठी भाषा और पहचान पर खतरे के रूप में देख रहे हैं। यह विवाद इस सच्चाई को उजागर करता है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में भाषा केवल शिक्षा का विषय नहीं, बल्कि लोगों की अस्मिता, भावनाओं और अधिकारों से जुड़ा गहरा प्रश्न है।
 

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