यूएई के एयरस्पेस में पहुंचते ही पीएम मोदी का जोरदार स्वागत, राष्ट्रपति ने खुद एयरपोर्ट पर किया रिसीव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (15 मई) को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी पहुंचे। यह उनकी पांच देशों की राजनयिक यात्रा की शुरुआत है। प्रधानमंत्री मोदी 10 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध की पृष्ठभूमि में हो रही यह यात्रा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अबू धाबी पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके अलावा, यूएई के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद, संयुक्त अरब अमीरात वायु सेना के एफ-16 लड़ाकू विमानों ने प्रधानमंत्री मोदी के विमान को सुरक्षा प्रदान की। इसे भारत-यूएई संबंधों के मजबूत होने का प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा कम समय की है, लेकिन इसका रणनीतिक महत्व बहुत अधिक है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में भारत के लिए प्रमुख ऊर्जा साझेदार देशों के साथ समन्वय बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद नाहयान के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस चर्चा के मुख्य विषय ऊर्जा सहयोग, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा होंगे। अधिकारियों के अनुसार, भारत के लिए स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना बातचीत का मुख्य केंद्र होगा। संयुक्त अरब अमीरात भारत को कच्चे तेल का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है और एलपीजी के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक माना जाता है। इसलिए, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के इस दौर में भारत के लिए यह बैठक विशेष महत्व रखती है।
संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा करेंगे। इसे यूरोप और नॉर्डिक देशों के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की व्यापक राजनयिक पहल का हिस्सा माना जा रहा है। इन देशों के साथ बैठकों में व्यापार विस्तार, हरित प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार और निवेश सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे, जिसमें सतत विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों और आर्थिक साझेदारी पर चर्चा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बहुराष्ट्रीय दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रही है। भारत एक ओर अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की प्रौद्योगिकियों और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
अबू धाबी में औपचारिक स्वागत और एफ-16 विमान का प्रदर्शन भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, अवसंरचना और निवेश के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग में तेजी से वृद्धि हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बहुपक्षीय साझेदारियों को मजबूत करके भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को सुदृढ़ करने की रणनीति को भी दर्शाती है।