नपुंसकता से जुड़ी जानकारी छुपाने पर पति की जमानत याचिका खारिज
14 Feb, 2021
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संजय मिश्रा/in24न्यूज़/मुंबई
अपने ससुराल वालों पर बदसलूकी और दहेज मांगने का आरोप लगाने वाली एक पीड़ित बहू को मुंबई हाईकोर्ट ने न्याय देते हुए बड़ा फैसला सुनाया. माननीय कोर्ट ने मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करते हुए यह माना कि आरोपी ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप है, जिन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नजर आ रही है. जिसके बाद माननीय न्यायाधीश ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया. दरअसल मुंबई हाई कोर्ट ने शादी से पहले अपनी नपुंसकता से जुड़े उप चारों की जानकारी छुपाने वाले एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. यही नहीं, कोर्ट ने इस गंभीर मामले में आरोपी ससुर और देवर की जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है. आपको बता दें कि पीड़िता ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मुंबई के सांताक्रूज पुलिस स्टेशन में साल 2020 में शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस में दी गई शिकायत में पीड़िता ने अपने डॉक्टर ससुर पर यूपी के बरेली स्थित ससुराल वाले घर में इंजेक्शन देकर दुराचार करने का आरोप भी लगाया था, जबकि कथित महिला द्वारा उसके पति के नपुंसक होने का भी दावा किया गया था. इसके अलावा पीड़िता ने अपने ससुराल वालों पर बदसलूकी और दहेज मांगने का भी आरोप लगाया है. सांताक्रूज पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर कथित आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 373 (3), 328, 498ए, 109, 406 और 506 सहित विभिन्न धाराओं के तहत एफ आई आर दर्ज की थी.
सांताक्रूज पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज होने के बाद अपनी गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए कथित आरोपियों ने मुंबई हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दायर किया था, जिसमें न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल के समक्ष आरोपियों के जमानत आवेदन पर सुनवाई हुई. आरोपियों की तरफ से बचाव पक्ष के वकील गिरीश कुलकर्णी ने कहा कि उनके मुवक्किल पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं. आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की आवश्यकता नहीं है. यही नहीं एडवोकेट गिरीश कुलकर्णी ने यह भी कहा जनवरी 2020 में हुई घटना को जून 2020 में प्राथमिकी के रूप में दर्ज करने का क्या औचित्य है. इस लिहाज से एफ आई आर दर्ज कराने में देरी की गई. बचाव पक्ष के वकील ने यह भी कहा कि पीड़िता ने जिस घटना के संबंध में शिकायत दर्ज कराई है, वह यूपी के बरेली से संबंधित है और सांताक्रूज पुलिस स्टेशन को इसका कोई अधिकार नहीं बनता कि वह इस मामले की जांच करें.
जिस दौरान मुंबई हाईकोर्ट में आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी उस दौरान सरकारी वकील ने आरोपियों की जमानत का विरोध किया और कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. शिकायत कर्ता का पति मेडिकल जांच में सहयोग नहीं कर रहा है. चूंकि आरोपियों पर काफी गंभीर आरोप हैं इसलिए उन्हें जमानत न दी जाए. इससे पहले भी आरोपियों ने मामले को रद्द करने की याचिका लगाई थी जिसे माननीय न्यायपालिका ने खारिज कर दिया था. तमाम पहलुओं पर गौर करने के बाद माननीय न्यायाधीश ने यह माना कि आरोपियों पर लगे आरोप बेहद गंभीर है और इन्हें कस्टडी में लेकर पूछताछ की आवश्यकता नजर आ रही है लिहाजा आरोपियों की जमानत याचिका को माननीय न्यायाधीश ने खारिज कर दिया.