बेस्ट की बसों का होगा निजीकरण ?
आर्थिक राजधानी की दूसरी लाइफ लाइन कही जाने वाली बेस्ट की बसों में तैनात कंडक्टरों को भी अब कॉन्ट्रैक्ट पर लेने का खाका बेस्ट प्रशासन ने तैयार किया है. बेस्ट प्रशासन की तरफ से नए सिरे से लगभग 400 बसों को किराये पर लिया जाएगा, ऐसी तैयारी अभी से की जा रही है. किराये पर बस लेने और कॉन्ट्रैक्ट पर कंडक्टर को लेने के प्रस्ताव पर लगभग 2 हजार करोड़ कर खर्च अनुमानित है. अब राजनीतिक पार्टियों द्वारा बेस्ट प्रशासन के इस प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया जिसमे प्रमुख रूप से कांग्रेस और बीजेपी शामिल हैं. बेस्ट उपक्रम में शामिल होने वाले नए सभी बस किराये के आधार पर निर्धारित होंगे. लेकिन इस नई प्रणाली में बस सेवा देने वाला चालक कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर जबकि बस का कंडक्टर बेस्ट उपक्रम का कर्मचारी होगा ऐसा प्रस्ताव पहले तैयार किया गया था लेकिन अब बेस्ट प्रशासन ने इसमें बदलाव करते हुए बस कंडक्टर को भी कॉन्ट्रैक्ट पर रखने का प्रस्ताव तैयार किया है. यदि ये प्रस्ताव मंजूर हुआ तो आने वाले समय में बेस्ट में कॉन्ट्रैक्ट स्तर पर कंडक्टर की नियुक्ति होगी ऐसी चर्चा अब अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों में होने लगी है.
बेस्ट उपक्रम के प्रस्ताव के मुताबिक अगले 10 सालों के लिए लगभग 400 बसों को किराए पर लिया जायेगा. इसके लिए बेस्ट उपक्रम पर लगभग 1,980 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. ये सभी बसें वातानुकूलित होंगी और इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जायेगा. बेस्ट ने इससे पहले 1,100 बस किराए पर लिया था जिसमे अब 400 नई बसें शामिल होगी जो किराए पर लिए जाने के लिए प्रस्तावित हैं. इस तरह बस में कॉन्ट्रैक्ट पद्धति के जरिये कंडक्टर की नियुक्ति की बात को अब विपक्ष बेस्ट के निजीकरण का आरोप लगा रहा है. कांग्रेस पार्टी के नेता और मुंबई मनपा के विरोधी पक्ष नेता रवि राजा ने बेस्ट उपक्रम के इस प्रस्ताव का विरोध किया है. इसके अलावा भाजपा के सुनील गणाचार्य ने बेस्ट उपक्रम द्वारा कॉन्ट्रैक्ट पद्धति से बस चालकों और बस कंडक्टरों की नियुक्ति किये जाने के प्रस्ताव को पूरी तरह से बेस्ट का निजीकरण बताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण और अयोग्य ठहराया. कुल मिलाकर बेस्ट ने अगले तीन साल में बसों की संख्या 6 हजार से ज्यादा करने का निर्णय लिया है. बेस्ट उपक्रम के पास 3,600 से ज्यादा बस हैं जिसमे 1,100 बस किराए पर चल रही हैं.