देशभक्ति या धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला... महाराष्ट्र में राष्ट्रीय गीत पर क्लेश !
वंदे मातरम सिर्फ एक गाना नहीं है बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। एक ऐसी रचना है जिसने स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माताओं की अनगिनत पीढ़ियों को प्रेरित किया है। वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा की गई थी। अंग्रेजों के दौर में वंदे मातरम् ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ भारतीय एकता पहचान बन गया। लिहाजा ब्रिटिश सरकार ने स्कूलों में इसे गाने पर रोक लगाई और छात्रों को दंड भी दिया। लेकिन गीत की गूंज नहीं रुकी।
ये स्वदेशी आंदोलन पूरे देश में फैल गया। इससे अंग्रेजों की नींद उड़ गई थी क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ये गीत क्रांतिकारियों की शक्ति और उत्साह का प्रतीक बन गया। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान दर्जा दिया जाना चाहिए और समान रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए।
आज भी वंदे मातरम देश के प्रति गर्व, प्रेम और समर्पण की याद दिलाता है। ये गीत आज भी हर भारतीय के दिल में उत्साह और देशभक्ति की प्रेरणा देता है। वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। हालांकि इस जश्न के बीच वंदे मातरम को लेकर राजनीति भी खूब हो रही है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में चुनावों से पहले वंदे मातरम को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। दरअसल महाराष्ट्र सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों में पूरा वंदे मातरम गए जाने को लेकर निर्देश दिया है। जिसका कुछ दल विरोध कर रहे हैं। खासकर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी, जिन्होंने न सिर्फ वंदे मातरम गए जाने का विरोध किया बल्कि उन्होंने सरकार पर मुसलमान की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने कहा कि मुसलमान सिर्फ अल्लाह के सामने सिर झुकाते हैं। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी इसे देशभक्ति का मुद्दा बता रही है और कह रही है कि देश में रहने वाले को वंदे मातरम कहना होगा।
मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने सपा विधायक अबू आजमी को पत्र लिखकर वंदे मातरम कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया। जिसके जवाब में आजमी ने कहा कि जैसे आप नमाज नहीं पढ़ सकते, वैसे ही कोई मुसलमान वंदे मातरम नहीं बोल सकता। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी द्वारा धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् का पाठ करने से इनकार करने के बाद, बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके घर के बाहर राष्ट्रीय गीत का किया।
बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए आजमी ने अपने घर से शरबत पीने के लिए भेजा था। भारतीय जनता पार्टी ने उनके मुंबई स्थित घर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया है। अबू आजमी ने कहा है, जिसको गाना है, वो गाये उनको नहीं गाना है। इस बयान के बाद बीजेपी कार्यकर्ता भड़क गए और भारत माता की तस्वीर लेकर प्रदर्शन करने पहुंच गए। विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर और राज्य मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा सहित कई नेताओं ने अबू आजमी के घर के बाहर वंदे मातरम का गायन किया।
बीजेपी विधायक राज के पुरोहित ने आज़मी के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि ये प्रतीकात्मक है। वंदे मातरम् गाया जाना चाहिए और देश का सम्मान किया जाना चाहिए। अगर आपको देश से प्यार नहीं है, तो पाकिस्तान चले जाइए। अबू आजमी ने अपना बचाव करते हुए कहा कि वे भारत का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका धर्म कुछ खास इबादत की इजाजत नहीं देता है। इस्लाम अपनी मां का सम्मान करने को बहुत महत्व देता है, लेकिन यह उनके सामने सजदा करने की इजाज़त नहीं देता है। लेकिन बीजेपी ने तय किया है कि मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में वंदे मातरम गीत के 150 साल पूरे होने पर सामूहिक गायन किया जाएगा।
बीजेपी नेताओं द्वारा मुस्लिम विधायकों असलम शेख और अमिन पटेल के घरों के बाहर वंदे मातरम् गाने की मुहिम पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि बीजेपी का ये दुष्प्रचार निंदनीय और शर्मनाक है, क्योंकि कांग्रेस के किसी भी विधायक ने कभी वंदे मातरम् का विरोध नहीं किया। कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग संविधान का विरोध करते थे, जिन्होंने सालों तक अपने कार्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया, वही आज राष्ट्रभक्ति का दिखावा कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि वंदे मातरम् हमारी रगों में है, इसे हमें कोई सिखाने की ज़रूरत नहीं। कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसके लिए वंदे मातरम्' केवल दिखावा है, जबकि असली राष्ट्रभक्ति वह है जो एकता, समानता और संविधान के सम्मान में दिखती है।