मेस्मा लागू करने के बाद भी नहीं रुकी हड़ताल, महाराष्ट्र में बिजली संकट का खतरा
संवाददाता/ in24 न्यूज़।
महाराष्ट्र में बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ तीन सरकारी बिजली कंपनियों के हजारों कर्मचारी 72 घंटे की हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारी इन कंपनियों के निजीकरण होने पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पूरे राज्य में विरोध कर रहे हैं। इससे राज्य में बिजली संकट पैदा हो सकता है। वहीं इस हड़ताल को रोकने के लिए महाराष्ट्र की शिंदे सरकार ने महाराष्ट्र अत्यावश्यक सेवा कानून लागू किया है। जबकि कर्मचारियों ने दावा किया है कि मेस्मा का कोई असर नहीं हुआ है। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राज्य में बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के आवश्यक कदम उठाएं।महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स फेडरेशन के महासचिव ने कहा कि आधी रात से शुरू हुई इस हड़ताल में तीनों कंपनियों के हजारों कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। राज्य भर में विरोध शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा है, उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी कर्मचारी अपने प्रतिष्ठानों के बाहर बने पंडालों में बैठे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें बैठक के लिए बुलाया है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सह्याद्री गेस्ट हाउस में कर्मचारी संघों की कार्य समिति के सदस्यों से मुलाकात करेंगे।
महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड , महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड और महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन कंपनी लिमिटेड ये तीन महाराष्ट्र सरकार के स्वामित्व वाली बिजली कंपनियां हैं। इस बीच, बिजली कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा हड़ताल की चेतावनी देने के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने मेस्मा लागू किया, ताकि राज्य में कानून व्यवस्था बनी रहे और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा की जा सके। महाराष्ट्र राज्य कर्मचारी, अधिकारी और अभियंता संघर्ष समिति से जुड़ी 31 यूनियन के सदस्यों ने पिछले महीने से विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। इनकी प्रमुख मांगों में अडानी समूह की एक सहायक कंपनी को बिजली वितरण का समांतर लाइसेंस जारी नहीं करने की मांग शामिल है। पिछले साल नवंबर में समूह की कंपनी ने यह लाइसेंस हासिल कर लिया है। कंपनी मुंबई के कुछ और क्षेत्रों में बिजली वितरण शुरू करने जा रही है। अडानी इलेक्ट्रिसिटी नवी मुंबई में अदाणी ट्रांसमिशन की सहायक कंपनी है। उसने महाराष्ट्र राज्य विद्युत नियामक आयोग को मुंबई के कुछ और इलाकों में समानांतर बिजली वितरण के लिए आवेदन दिया था। कंपनी महावितरण के अधिकार क्षेत्र वाले भांडुप, मुलुंड, ठाणे, नवी मुंबई, पनवेल, तलोजा और उरन क्षेत्रों में बिजली वितरण करना चाहती है। हड़ताल को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारियों को हर हाल में बिजली वितरण सामान्य बनाए रखने का निर्देश दिया है।