केंद्र सरकार पर बरसा सुप्रीम कोर्ट, कहा- अदालत के फैसले का नहीं हो रहा सम्मान
संवाददाता/in24 न्यूज़।
केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से फटकार लगाई गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट ट्रिब्यूनल सुधार एक्ट और नियुक्तियों में हो रही देरी को लेकर केंद्र पर बरसा है। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार अदालती फैसलों का कोई सम्मान नहीं है। चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि हमें लगता है कि केंद्र को इस अदालत के फैसलों का कोई सम्मान नहीं है। आप हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। हमने पिछली बार भी पूछा था कि आपने ट्रिब्यूनलों में कितनी नियुक्तियां की हैं। हमें बताइए कि कितनी नियुक्तियां हुई हैं। हमारे पास तीन ही विकल्प हैं, पहला कानून पर रोक लगा दें, दूसरा ट्रिब्यूलनों को बंद कर दें और खुद ट्रिब्यूनलों में नियुक्ति करें और फिर सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करें।चीफ जस्टिस ने कहा कि हम जजों की नियुक्ति के मामले पर आपने जिस तरह से कदम उठाए, उसकी सराहना करते हैं। लेकिन ट्रिब्यूनल के लिए एक सदस्यों की नियुक्ति के लिए इतनी देरी का कारण क्या है, यह समझ से परे है। एनसीएलटी में रिक्तियां पड़ी हैं। अगर आपको इस कोर्ट के दो जजों पर भरोसा नहीं है, तो फिर हम क्या कह सकते हैं। फिलहाल हम नए कानून पर भरोसा नहीं कर सकते जब हमारे के पहले आदेशों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एसजी तुषार मेहता ने वित्त मंत्रालय के दिनांक 6/09/2021 के पत्र को पढ़ा कि सदस्यों की नियुक्ति पर निर्णय 2 महीने के भीतर लिया जाएगा। जस्टिस नागेश्वर राव ने कहा कि हम जिन ट्रिब्यूनलों की सिफारिशों के बारे में बात कर रहे हैं, वे इस सुधार विधेयक के अस्तित्व में आने से 2 साल पहले भेजे गए थे। आपने उन्हें नियुक्त क्यों नहीं किया? कानूनों के अनुसार की गई सिफारिशें जैसे वे तब मौजूद थीं, उन्हें क्यों नहीं किया जाता ? अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार किस कदर अपने व्यवहार में फर्क लाती है !