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न कोई हमारी सीमा में घुसा, न ही पोस्ट किसी के कब्जे में है : पीएम मोदी

20 Jun, 2020 791

संवाददाता/in24 न्यूज़.
चीन और भारत के बीच चल रहे विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चीन के साथ छह सप्ताह से सीमा पर बने हुए गतिरोध के मुद्दे पर किसी ने भारतीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया और ना ही भारतीय चौकियों पर कब्जा किया गया है। मोदी ने पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 20 जवानों की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि एलएसी पर चीन के कदमों से पूरा देश आहत और आक्रोशित है। उन्होंने यह रेखांकित भी किया कि देश शांति और मित्रता चाहता है, लेकिन संप्रभुता की रक्षा सर्वोपरि है। पीएम मोदी ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के हालात पर चर्चा के लिए बुलाई सर्वदलीय बैठक में कहा कि सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों ने भारत की तरफ आंख उठाकर देखने की हिमाकत करने वालों को सबक सिखाया। उन्होंने कहा कि सेना को यथोचित कदम उठाने की आजादी दी गई है। सरकार ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने बैठक की शुरुआत में स्पष्ट किया कि न वहां कोई हमारी सीमा में घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई चौकी किसी दूसरे के कब्जे में है। बयान के अनुसार उन्होंने नेताओं को भरोसा दिलाया कि सशस्त्र बल देश की रक्षा के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे। प्रधानमंत्री का यह स्पष्ट बयान इन खबरों के बीच आया है कि चीनी सेना ने पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी समेत पूर्वी लद्दाख के अनेक क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा के भारतीय पक्ष की तरफ घुसपैठ की है। पीएम मोदी ने कहा कि एक तरफ सेना को जरूरी कदम उठाने के लिए आजादी प्रदान की गई है, वहीं भारत ने कूटनीतिक तरीकों से चीन को अपने रुख से स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास आज इतनी क्षमता है कि कोई भी हमारी एक इंच जमीन की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देख सकता। बैठक में अपने समापन वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय बलों को देश की रक्षा के लिए जो करना है, वो कर रहे हैं, चाहे सैनिकों की तैनाती हो, कार्रवाई हो या जवाबी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि हमारे नवनिर्मित बुनियादी ढांचों, खासतौर पर एलएसी पर निर्माणों की वजह से हमारी गश्त क्षमता बढ़ी है।  पीएम ने कहा कि सरकार ने भारत की सीमाओं को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी संरचना के विकास को प्राथमिकता दी है। लड़ाकू विमानों, आधुनिक हेलीकॉप्टरों, मिसाइल रक्षा प्रणाली और अन्य ऐसी जरूरतों के प्रावधान किए गए हैं। पीएम मोदी ने देश और इसके नागरिकों के कल्याण की सरकार की प्रतिबद्धता रेखांकित करते हुए कहा कि व्यापार हो, कनेक्टिविटी हो या आतंकवाद निरोधक कार्रवाई हो, सरकार ने हमेशा बाहरी दबाव का डटकर सामना किया है। एक सरकारी बयान के अनुसार उन्होंने आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और जरूरी बुनियादी संरचना के निर्माण के लिए आवश्यक सभी कदम तेज गति से उठाए जाते रहेंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई बैठक करीब चार घंटे तक चली जिसमें भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार, तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी , बसपा अध्यक्ष मायावती, माकपा नेता सीताराम येचुरी, द्रमुक नेता एम के स्टालिन और शिवसेना के उद्धव ठाकरे समेत विपक्षी दलों के प्रमुख नेता शामिल रहे. कांग्रेस और वाम दलों ने भाजपा नीत राजग सरकार को इस मुद्दे पर घेरने का प्रयास किया, वहीं भाजपा की मुखर आलोचक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक समेत अन्य कुछ दलों ने इस मसले पर सरकार को पूरी तरह समर्थन जताया। सरकार ने कहा कि राजनीतिक दलों के नेताओं ने लद्दाख में सशस्त्र बलों की बहादुरी की प्रशंसा की और इस जरूरत के समय प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने सरकार के साथ एकजुटता से खड़े रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बैठक में सोनिया गांधी ने सरकार से कुछ सख्त सवाल पूछे मसलन क्या एलएसी पर बने हालात पर कोई खुफिया विफलता हुई है? उन्होंने मोदी से आश्वासन देने को कहा कि सीमा पर यथास्थिति बहाल की जाएगी। सोनिया ने अपने शुरुआती बयान में कहा कि इस स्तर पर भी वे इस संकट के कई महत्वपूर्ण पहलुओं से अनभिज्ञ हैं। उन्होंने सरकार के सामने सवाल रखे और पूछा कि चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में कब प्रवेश किया? उन्होंने पूछा कि क्या सरकार के विचार से कोई खुफिया नाकामी हुई? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश शहीदों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।  

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